ये सुधार नहीं हुआ तो बेपटरी होती रहेंगी ट्रेनें

ये सुधार नहीं हुआ तो बेपटरी होती रहेंगी ट्रेनेंयूपी के मुजफ्फर नगर के खतौली में हुआ था रेल हादसा 

बीसी यादव, गाँव कनेक्शन/स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

जौनपुर (मछलीशहर)। एक तरफ जहां देश में बुलेट ट्रेन चलाने की बात हो रही है, वहीं एक के बाद एक देश में कई रेल हादसे हुए। ज्यादातर मामलों में रेल की पटरियों से जुड़ी खामियां वजह रही। हैरत की बात है कि वर्षों पुरानी इस समस्या को दूर करने में रेलवे नाकाम रहा है और कई जगह जर्जर पटरियों पर रेलें दौड़ रही हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में बुलेट ट्रेनें चलाने की बात कर रहे हैं, जबकि देश के ज्यादातर हिस्सों में पटरियों की हालत खराब है। खासतौर पर उत्तर और पूर्वोत्तर रेलवे की पटरियों की हालत ज्यादा भयावह है। अभी खराब पटरी की ही वजह से मुजफ्फरनगर के खतौली में हुआ ट्रेन हादसा ताजा उदाहरण है। बात करें वाराणसी-लखनऊ रेल प्रखंड की तो यहां पर सरांयहरखू से लेकर नीमा हॉल्ट तक करीब छह स्थानों पर ट्रैक खराब है, जिसमें मानवरहित गेट संख्या 20 और 22 पर बने अंडरपास रास्ते में पानी भरने की समस्या भी शामिल है। इसके अलावा पहितिया पुल संख्या 118 नीमा हॉल्ट कोहरीपुर 871/827 किलोमीटर महारानी पश्चिम पुल संख्या 163 पर ट्रेनों की गति महज 30 किलोमीटर है।

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इस रूट से कई राजधानी एक्सप्रेस के अलावा, सुपरफास्ट और एक्सप्रेस ट्रेनें गुजरती हैं। कॉशन होने के नाते 120 की गति से चलने वाली राजधानी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों की स्पीड घटकर 30 या कहीं-कहीं 10 किलोमीटर प्रति घंटे ही रह जाती है। यही वजह है कि ट्रेनें लेट भी हो जाती हैं। इसके चलते यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। यह परेशानी तब और बढ़ जाती है। जब ट्रेन हादसे में बदल जाती है। कुछ ऐसा जौनपुर-जंघई रेलवे प्रखंड का भी हाल है। यहां पर जफराबाद और मड़ियाहूं के बीच 10 और 14 किलोमीटर पुल पर ट्रेनें कॉशन पर गुजारी जा रही हैं। इसके अलावा सई नदी के ऊपर बने पुल पर भी ट्रेनों को कॉशन से गुजारा जाता है। यहां ट्रेनों की रफ्तार सिर्फ 10 किलोमीटर की प्रति घंटा की रहती है।


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वाराणसी-लखनऊ मार्ग पर पटरियों का दोहरीकरण

वाराणसी-लखनऊ मार्ग पर पटरियों का दोहरीकरण काम लगभग पूरा हो गया है, लेकिन जो पुरानी समस्या है। वह जस की तस बनी हुई है। इसके अलावा जौनपुर-जंघई रेल मार्ग पर जिन जगहों पर ट्रेनों को कॉशन से गुजारा जा रहा है। वहां पर स्लीपर पुराने लगे हैं। इस वजह से ट्रेनों को उसकी तय गति से नहीं दौड़ाया जा पा रहा है। सीनियर सेक्शन इंजीनियर डीएन मिश्रा के मुताबिक, जौनपुर-जंघई मार्ग पर जिन जगहों पर पुराने स्लीपर लगाए गए हैं। उन्हें बदलने के लिए रेलवे के उच्चाधिकारियों से स्लीपर की व्यवस्था करने के लिए पत्र भेजा गया है। स्लीपर मिलते ही लगवा दिया जाएगा, जिससे समस्या दूर हो जाएगी।

जहां कहीं भी ट्रैक में कोई दिक्कत है। उसे दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। फिलहाल ट्रेनों को कॉशन पर गुजारा जा रहा है। कोई हादसा न हो जाए। इसलिए पेट्रोलिंग करने वाले कर्मचारियों को हर वक्त सतर्क करने का आदेश दिया गया है।
मनोज तिवारी वरिष्ठ खंड अभियंता रेलवे

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