ब्रिटेन में एक स्कूल ने बच्चों से कहा- जूते नहीं चप्पल पहन कर आएं, पढ़ाई में लगेगा मन, पढ़िए- यूपी के बच्चों की क्या है राय

Meenal TingalMeenal Tingal   24 Feb 2017 2:41 PM GMT

ब्रिटेन में एक स्कूल ने बच्चों से कहा- जूते नहीं चप्पल पहन कर आएं, पढ़ाई में लगेगा मन, पढ़िए- यूपी के बच्चों  की क्या है रायलखनऊ के कई स्कूलों के बच्चों और शिक्षकों से बात की गई तो इस बारे में मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के पैरों को आराम देने और कक्षा का वातावरण साफ रखने के लिए ब्रिटेन के डर्बी शहर के एक स्कूल ने भले ही अपने स्कूल के छात्रों को जूते की जगह स्लीपर्स या चप्पल पहन कर आने की बात कही हो, लेकिन लखनऊ के कई स्कूलों के बच्चों और शिक्षकों से बात की गयी तो इस बारे में मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली।

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छोटे बच्चे जहां स्कूल में जूते नहीं पहनना चाहते तो वहीं बड़ी क्लास के बच्चे जूते इसलिए पहनना चाहते हैं ताकि उनका लुक अच्छा दिखायी दे। वहीं, शिक्षकों और मनोचिकित्सकों ने भी इस विषय में अपनी राय व्यक्त की। इस बारे में सेंट जेवियर इंटर कॉलेज में कक्षा 9 में पढ़ने वाली प्रीति सिंह (14 वर्ष) ने अपने विचार रखते हुए कहा कि जूते के बिना ड्रेस अच्छी नहीं लगती। स्कूल ड्रेस के साथ अगर जूते नहीं पहनती हूं तो अधूरा सा लगता है और देखने में भी खराब लगता है।

वहीं, वारसिया पब्लिक स्कूल इंटर कॉलेज में एलकेजी में पढ़ने वाले रेहान खान (7 वर्ष) कहते हैं कि सुबह से छुट्टी तक जूते पहने-पहने पैर दर्द करने लगते हैं। खुजली भी होती है और पसीना भी आता है। मगर छुट्टी में रिक्शे में बैठते हैं तो जूते उतार देते हैं।

जयपुरिया स्कूल में पढ़ने वाली कक्षा तीन की इस्मतजहां (8 वर्ष) कहती हैं कि पैर थक जाते हैं, लेकिन जूते तो पहनने ही पड़ते हैं। अगर कभी न पहनूं तो डांट पड़ती है, घर पर शिकायत होती है। इसलिए पहन कर तो आते हैं लेकिन क्लास में चुपचाप सीट के नीचे उतार देते हैं। इंटरवल और छुट्टी में फिर से पहन लेते हैं।

ब्रिटेन के स्कूल ने लगाई है पाबंदी

इस विषय में सेंट जेवियर्स इंटर कॉलेज की निदेशक अर्जुमंद जैदी कहती हैं कि स्कूल से घर जाने के बाद बच्चे दिन और रात में अपने घर में चप्पल में ही रहते हैं। मुझे नहीं लगता है कि कुछ घंटों के लिए जूते पहनने से उनको कोई दिक्कत होती होगी। जूते पैरों को सुरक्षित रखते हैं। बच्चों को ज्यादा आराम में नहीं रखा जा सकता क्योंकि उसकी आदत पड़ जाती है।

क्या कहते हैं मनोचिकित्सक

वहीं, मनोचिकित्सक डॉ. शाजिया सिद्दीकी कहती हैं कि बड़े बच्चे हों या युवा, कोई भी आजकल चप्पल में रहना नहीं चाहता, क्योंकि यह उनके लुक को कमजोर करता है। लेकिन बच्चों की बात करें तो कई घंटों तक लगातार जूते पहने रहने से उनको कुछ उलझन जरूर हो सकती है। वह थक सकते हैं या पैरों में दर्द और खुजली हो सकता है लेकिन स्कूल में ड्रेस के साथ जूते अनुशासन का प्रतीक हैं। बच्चों को जूते पहनने से परेशानी न हो इसके लिए पीटी और योगा क्लास के साथ इंटरवल में बच्चों को जूते उतरवा देना चाहिए जिससे उनकी समस्या भी दूर हो जाएगी और उनको अनुशासन में रहना भी आयेगा।

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