मदरसे के बच्चे भी पढ़ते हैं त्वमेव माता च पिता त्वमेव...

मदरसे के बच्चे भी पढ़ते हैं त्वमेव माता च पिता त्वमेव...मदरसे में बच्चों को संस्कृत पढ़ातीं शिक्षिका रेशमी सैनी।

अजय मिश्रा

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

कन्नौज। जिले के एक मदरसा गंगा-जमुनी तहजीब को बढ़ावा दे रहा है। यहां उर्दू-फारसी के साथ-साथ संस्कृत की भी तालीम दी जाती है।

शहर के हाजीगंज मोहल्ले में मदरसा एसए पब्लिक मेमोरियल स्कूल है। यहां पर मदरसों में मिलने वाली शिक्षा के साथ ही कॉन्वेंट स्कूलों की तर्ज पर भी नौनिहालों को ढाला जा रहा है। कम्प्यूटर पर उंगलियां थिरकने के अलावा संस्कृत का हिन्दी में उच्चारण भी बच्चे अच्छे ढंग से करते हैं। हिन्दी से संस्कृत में भी जवाब खटाखट देते हैं।

यूपी मदरसा शिक्षा परिषद के अनुसार यूपी में अभी तक कुल 2993 स्थायी मान्यता प्राप्त मदरसे हैं। हाल ही में परिषद ने 1370 मदरसों को मान्यता दिए जाने का निर्णय लिया था। कक्षा दो में पढ़ने वाले 12 वर्षीय आदित्य कुशवाहा ने बताया, "मुझे पहले नहीं मालूम था कि मदरसे में संस्कृत पढ़ाई जाती है। जब पता चला तो संस्कृत सीखने यहां आ गया। मेरी मैम हमें अच्छे से संस्कृत की जानकारी देती हैं।"

मदरसे में जहां मुस्लिम बच्चे नात पढ़ते हैं तो हिन्दू बच्चे गायत्री मंत्र और हनुमान चालीसा आदि भी पढ़ते हैं। कक्षा एक में पढ़ने वाली नौ वर्षीय निधि सैनी का कहना है, "मैम ने कहा था कि मैं संस्कृत पढ़ूं, इसके बाद मैंने यह विषय पढ़ना शुरू कर दिया है। यहां ‘त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बंधुत्व च सखा त्वमेव। त्वमेव विद्या द्रविणम त्वमेच, त्वमेव सर्वम् मम देव देव, आदि संस्कृत श्लोक और किताबों के बारे में अच्छे से बताया जाता है।" कक्षा तीन में पढ़ने वाला 10 वर्षीय बालक वैभव सिर्फ इसलिए मदरसे में आता है कि उसे यहां संस्कृत भी पढ़ाई जाती है।

हिन्दू बच्चों की उर्दू भी पसंद

मदरसे के प्रबंधक शेख सलाउद्दीन का कहना है कि मदरसे में कई हिन्दू बच्चे उर्दू पढ़ने के लिए भी आते हैं। यूकेजी की छात्रा जाहन्वी पाल की मां शिखा पाल इसलिए उसको यहां भेजती हैं कि उर्दू भी पढ़ने को मिल सके। पारस एलकेजी में पढ़ती है, उसे भी उर्दू में रुचि है।

मोहम्मद साकिब, प्रधानाचार्य, मदरसा एस. ए. पब्लिक मेमोरियल स्कूल, हाजीगंज, कन्नौज
यहां कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को संस्कृत पढ़ाई जाती है। इसकी जिम्मेदारी शिक्षिका रेशमी सैनी को दी गई है। हिन्दू बच्चे भी उर्दू की शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। यहां बच्चों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाता है। मदरसे में हिन्दू-मुस्लिम आदि सभी बच्चों की गंगा-जमुनी तहजीब देखने को मिलती है।

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