छह वर्ष बाद भी लाभार्तियों को नहीं मिल पाया उनका आशियाना

Divendra SinghDivendra Singh   20 Feb 2017 11:13 AM GMT

छह वर्ष बाद भी लाभार्तियों को नहीं मिल पाया उनका आशियानाछह वर्ष से भी अधिक समय बीत जाने के बाद भी लाभार्तियों को अभी तक उनका हक़ नहीं मिल पाया है।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

पट्टी (प्रतापगढ़)। सभी पार्टियों ने अपने घोषणा पत्र में गरीबों को सस्ता घर मुहैया कराने का वादा किया है, लेकिन जिले में करोड़ों की लागत से बना कांशीराम आवास अब तक गरीबों को न मिल पाया।

जब यहां पर कालोनी बननी शुरू हुई तो हम गरीबों को लगा कि अब हमारा भी अपना घर होगा, फार्म भी भर दिया था। कालोनी को बने भी इतने साल हो गए लेकिन अभी तक हमें आवास नहीं मिल पाया है।
महमूद अली, निवासी, बीबीपुर

प्रतापगढ़ जिला मुख्यालय से लगभग 28 किमी. दूर नगर पंचायत पट्टी के बीबीपुर और रायपुर में कांशीराम आवास योजना के तहत कालोनियां बनायीं गयीं थीं। छह वर्ष से भी अधिक समय बीत जाने के बाद भी लाभार्तियों को अभी तक उनका हक़ नहीं मिल पाया है।

शासन को रिपोर्ट भेज दी गयी है, अभी सभी चुनाव में व्यस्त हैं। चुनाव के बाद लाभार्थियों को आवास मिल जाएंगे।
डॉ. आदर्श सिंह, जिलाधिकारी, प्रतापगढ़।

कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना के तहत बीबीपुर में छह ब्लॉक में 72 आवास और पुरानी अस्पताल के पास सात ब्लॉकों में 84 आवास बनाए गए थे। आवास के निर्माण के बाद शासन के निर्देश पर इसका आवंटन भी दिसंबर 2011 में कर दिया गया। यहां बने सभी आवासों में से 117 का आवंटन तहसील प्रशासन और नगर पंचायत के संयुक्त प्रयास से लोगों को प्रदान किया गया था, लेकिन आवंटन के छह वर्ष बीत जाने के बाद भी लाभार्थियों को इस पर कब्जा नहीं मिल सका।

कांशीराम आवास योजना की कालोनियों की जानकारी शासन से मांगी गई थी। जिलाधिकारी के निर्देश पर भवनों की फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी भी करायी थी। पूरी रिपोर्ट जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भी भेजी गयी है।
विनय कुमार तिवारी, ईओ, पट्टी नगर पंचायत।

छह महीने पहले शासन ने मांगी थी रिपोर्ट

छह महीने पहले जिला प्रशासन से कांशीराम आवास योजना की शासन ने रिपोर्ट मांगी थी। डीएम के निर्देश पर नगर पंचायत के कर्मचारियों ने भवन की फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी भी करायी। लेकिन छह महीने बीत जाने के बाद भी मामला जहाँ का तहां है।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

More Stories


© 2019 All rights reserved.

Top