अभी भी पैसे के लिए बैंक के चक्कर काट रहे ग्रामीण

अभी भी पैसे के लिए बैंक के चक्कर काट रहे ग्रामीणआए दिन खत्म होते हैं गाँव के बैंकों में पैसे।

रबीश कुमार वर्मा, स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

फैजाबाद। नोटबंदी के बाद भले ही बैंक के समान्य होने का दावा किया जा रहा हो, लेकिन अभी तक बैंक की स्थिति पूरी तरह से समान्य नहीं हो पाई है। कई ऐसे भी बैंक हैं, जहां पर लोगों को भुगतान नहीं मिल पा रहा है। बैंकों में किसानों के गन्ने का पैसा आता तो है, लेकिन बैंक में पैसा न होने की वजह से उनको समय से पैसा नहीं मिल पा रहा है, जिसके लिए उनको कई दिन तक लाइन में लगना पड़ रहा है। चेक का भुगतान होने में हफ्ते लग जाते हैं।

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सरजुपुर गाँव के रहने वाले सुनिल कुमार (28 वर्ष) बताते हैं, “हमारे रिश्तेदारी में लड़की की शादी है, हमें कपड़े और सामान खरीदना है, जिसके लिए हम पैसे निकालने एक दिन पहले आये थे तो पैसा नहीं था आज आये तो बैंक कर्मचारी सिर्फ दो हजार रुपए देने की बात कह रहे हैं, जिससे हमारा काम नहीं चल पाएगा और हमें किसी से उधार पैसे लेना पड़ेंगे।

इस समय शादी-ब्याह का सीजन चल रहा है। जब किसान मिल में बेचे गन्ने का पैसा लेने बैंक में जाता हैं तो बैंक में पैसे खत्म रहते हैं या तो लंबी लाइन लगाना पड़ती है, जिस से उस को पूरे दिन लग जाता है पूरे दिन लाइन लगाने के बावजूद भी उन्हें जरूरत के हिसाब से पैसे नहीं मिल पाते।This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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