गाँव से लेकर शहरों तक मुसीबत बने आवारा जानवर

गाँव से लेकर शहरों तक मुसीबत बने आवारा जानवरगाँव में खेती-किसानी के लिए आवारा पशु मुसीबत बने हुए हैं

स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

फैजाबाद। गाँव में खेती-किसानी के लिए आवारा पशु मुसीबत बने हुए हैं। वहीं शहरों में भी आए दिन आवारा पशुओं की वजह से सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं।

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गाय पालन का व्यवसाय तो सदियों से चलता आ रहा है। लोग पहले बछड़ों को खेती-किसानी के उपयोग में लेते थे, लेकिन आधुनिक युग में ट्रैक्टर व मशीनरी का उपयोग बढ़ने के कारण इनका उपयोग धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है। पशुपालक बछड़ों को छोड़ देते हैं, जो फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

फैजाबाद रिकाबगंज के सामंत मौर्य (40 वर्ष) बताते हैं, “यहां पर गाय और बछड़ों के झुंड घूमते रहते हैं, जिससे यातायात काफी प्रभावित होता है। इनकी वजह से कभी-कभी तो सड़क ही जाम हो जाती है इनकी वजह से छोटी-मोटी दुर्घटनाएं भी होती रहती हैं, यह बीच सड़क पर ही घूमते रहते हैं।

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