पढ़ाई के साथ अभिनय सीख रहीं कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की लड़कियां 

पढ़ाई के साथ अभिनय सीख रहीं कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की लड़कियां कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की छात्राएं अब अभिनय में भी दिखाएंगी अपना जलवा।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। आजकल कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की लड़कियां पढ़ाई के बाद हर दिन अभिनय का पाठ सीख रही हैं, 11 मार्च को जिले भर के स्कूलों की लड़कियां थियेटर करने वाली हैं।

जिले में बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए काम करने वाली संस्था नवोन्मेष बच्चों को पढ़ाई के साथ ही अभिनय भी सिखा रहा है। सिद्धार्थनगर जिले के तेरह कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की लड़कियां हर दिन पढ़ाई के साथ ही अभिनय का भी पाठ सीख रहीं हैं।

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नवोन्मेष संस्था के निदेशक विजित सिंह कहते हैं, “इन दिनों सिद्धार्थनगर में ग्रामीण बच्चियों के साथ थिएटर कार्यशाला कर रहा हूं। इन बच्चियों को कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में रखकर, इनका सर्वांगीण विकास किया जा रहा है। इनके व्यक्तित्व निर्माण के लिए राज्य परियोजना निदेशक द्वारा थिएटर कार्यशाला का निर्णय लेना सराहनीय कदम है।”

आठ मार्च को महिला दिवस मनाया जाता है, इसलिए यहां पर दो से 11 मार्च तक 13 स्कूलों की बच्चियों को अभिनय सिखाया जा रहा है, ग्यारह तारीख को सभी स्कूलों में नाटक किया जाएगा, जिसमें बच्चों के अभिभावकों को बुलाया जाएगा। ये एक अच्छी शुरुआत है आगे भी ऐसे कार्यक्रम किए जाते रहेंगे।”
सुरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, राज्य परियोजना निदेशक, सिद्धार्थनगर

केन्द्र सरकार ने सर्वशिक्षा अभियान‎ को बढ़ावा देने के लिए कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय योजना के निर्देशन में देशभर में 750 आवासीय स्कूल खोलने का प्रावधान किया है। इन विद्यालयों में कम से कम 75 फीसदी सीटें अनुसूचित जाति व जनजाति, पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक वर्गों की बालिकाओं के लिए आरक्षित होती हैं बाकी 25 फीसदी गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वाले परिवार की बालिकाओं के लिए है। ग्रामीण छात्र-छात्राओं को रंगमंच की बारीकियों से परिचित कराने और उनमें मौजूद अभिनय क्षमता को उकेरने के लिए नवोन्मेष संस्था ‘आओ नाटक करें’ कार्यक्रम का आयोजन कराती है। इस आयोजन में छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह से प्रतिभाग करते हुए अपने हुनर को निखारने के गुर सिखाया जाता है।

‘आओ नाटक करें’ का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण अंचल में पल रही उन प्रतिभाओं को आगे लाना है जो उचित मार्गदर्शन के अभाव में खुद को तराश नहीं पा रहे हैं। इस आयोजन से नवोन्मेष को तमाम ऐसे ग्रामीण बच्चे मिले जिनमें मौलिक अभिनय क्षमता है और अगर उन्हें नियमित प्रशिक्षण मिले तो वो अभिनय जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बना सकते हैं।

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