सुल्तानपुर में बढ़ा अरहर का रकबा

सुल्तानपुर में बढ़ा अरहर का रकबासुल्तानपुर में खेत में अरहर की फसल देखता किसान। फोटो:गाँव कनेक्शन

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क, देवांशु मणि तिवारी

लंभुआ, सुल्तानपुर। जिले के लंभुआ ब्लॉक में नारेन्दपुर गाँव के किसान सुखराम यादव (48 वर्ष) एक एकड़ खेत में अरहर की खेती करते हैं। पिछले कुछ वर्षों की अपेक्षा उनकी अरहर की फसल में इस बार अच्छे फूल आए हैं। फसल की पैदावार से सुखराम बहुत खुश हैं।

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खेत में लहलहा रही अरहर की फसल की ओर इशारा करते हुए सुखराम बताते हैं, “पिछले दो-तीन हफ्तों से ठंड काम पड़ गयी है और पाला नहीं गिर रहा है। अगर 15 से 20 दिन तक मौसम ऐसा ही रहेगा तो एक एकड़ में तीन से चार कुंतल अरहर मिल जाएगी।” जिला कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस वर्ष रबी में सुल्तानपुर जिले में 22,200 हेक्टेयर क्षेत्र में दलहनी फसलों की खेती की जा रही है। पिछले वर्ष जिले में दलहनी फसलों का रकबा 15,220 था। सुल्तानपुर जिले में मुख्य रूप से अरहर, उड़द, चना व मसूर दालों की खेती की जाती है।

हमने इस बार दलहन की खेती को बढ़ावा देने के लिए वैनी और सखसुखपुर गाँवों के किसानों को अरहर के उन्नत बीज मुहैया करवाये हैं। आगे हमारी कोशिश यह रहेगी कि जिले में जिन क्षेत्रों में दलहनी फसलों की पैदावार कम है, वहां किसानों को अधिक से अधिक बीज मुहैया करवाया जाए।
एके सिंह कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र, सुल्तानपुर

जिले में इस वर्ष दलहनी फसलों की पैदावार बढ़ने की बात कहते हुए जिला कृषि अधिकारी विनय कुमार वर्मा बताते हैं, “जिले में दलहन की पैदावार बढ़ाने के लिए ब्लॉक लेवल पर किसानों दाल के बीज बाटें जा रहे हैं। दाल की उन्नत खेती को जिले में बढ़ाने के लिए हम लगातार केवीके और कृषि संस्थानों की मदद लेकर किसानों को ट्रेनिंग भी दे रहे हैं।”

सुल्तानपुर जिले में मुख्य रूप से दलहनी की खेती लंभुआ, भदैयां, खरोदीकलां, दूबेपुर, कुड़वार और कूड़ेभार क्षेत्रों में होती है।

सुल्तानपुर जिले में निजी कृषि बीज विक्रेता सुभाष चंद्र उपाध्याय बताते हैं, “पूरे जिले में सरकारी बीज बहुत अधिक मात्रा में आता है, लेकिन इसके बावजूद काफी लोगों ने इस बार दुकान आकर बीज खरीदा है। सबसे अधिक अरहर और मसूर के बीज बिके हैं। सुल्तानपुर जिले के मध्य से गोमती नदी गुज़रती है, यह नदी कुल मिलाकर जिले के 500 से अधिक गाँवों को जोड़ती है। जिले में ज्यादातर दाल उत्पादन वाले गाँव नदी से सटे हुए हैं।

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