#स्वयंफेस्टिवल: ‘इंटरनेट साथी’ बनी और फिर ज़िंदगी बदल गई

#स्वयंफेस्टिवल: ‘इंटरनेट साथी’ बनी और फिर ज़िंदगी बदल गईगांव कनेक्शन फाउंडेशन ने ‘इंटरनेट साथी’ को दी पत्रकारिता की ट्रेनिंग

कम्यूनिटी जर्नलिस्ट: वीरेंद्र शुक्ला. सहयोग: संजू सिंह (इंटरनेट साथी)

गोड़ैचा (सीतापुर)। दिल्ली से करीब 500 किलोमीटर दूर गोड़ैचा क़स्बे में जमा हुई 35 लड़कियों और महिलाओं को उनके जानने वाले अब इंटरनेट साथी कहते हैं. 19 से 35 साल के बीच की इन महिलाओं के जीवन में इंटरनेट एक ख़ास तरह का बदलाव लाया है.

घाघरा नदी के किनारे एकदम बीहड़ गाँवों में जहां सड़कें अब भी नहीं बन पायी हैं ये लड़कियां ‘गूगल’ की मदद से मिले टेबलेट और मोबाइल के ज़रिये इंटरनेट के 4जी कनेक्शन में अब अपने भविष्य को उम्मीद के साथ देख रही हैं.

पास ही एक गाँव से आई रेनू वर्मा (22) को बीच ही में पढाई छोड़नी पड़ी. वो बताती हैं, “पढ़ाई छूटने के बाद मैं दुनिया से कटा-कटा सा महसूस करने लगी थी. लेकिन हाथ में इंटरनेट आ जाने से अब लगता है वापस दुनिया से जुड़ गई हूं और ज़रुरत पढने पर लोगों की मदद भी करती हूं”

गाँव की शादियों में रेनू की पूछ अब कुछ पढ़ गई है. “पहले कोई पूछता नहीं था. अब जिसे मेहंदी लगानी होती है मेरे पास ही आते हैं. मैं नए-नए डिज़ाइन इंटरनेट पे खोज लेती हूं ना”

रामपुर मथुरा ब्लॉक के बिसेसड़ गांव की रहने वाली संजू सिंह (21 वर्ष) की भी ज़िंदगी इंटरनेट ने काफ़ी हद तक बदल दी है. “मैं सीतापुर जिले से इंटरनेट साथी हूं. मुझे एक मोबाइल और टेबलेट मिला है, जिसमें अनलिमेटड इंटरनेट है। मैं इसके माध्यम से अपने गांव की महिलाओं और सहेलियों इंटरनेट और मोबाइल के बारे में जागरुक करती हूं. खाने की अलग-अलग रेसिपी भी इंटरनेट से ही मिल जाती है” संजू मानती हैं कि इंटरनेट ने उनकी ज़िंदगी का ज़ायका बदल दिया है.

अपने मोबाइल को दिखाते हुए संजू आगे बताती हैं, “हमारे गांव में शौचालय नहीं हैं और बिजली भी नहीं आती. लेकिन कोई इसके खिलाफ़ आवाज़ नहीं उठाता। अब मैं खुद ये काम करूंगी और अपने गांव की समस्याएं लिखकर गांव कनेक्शन को दूंगी।”

गाँव कनेक्शन फाउन्डेशन के स्वयं फेस्टिवल में शरीक होने आई इन लड़कियों ने अपने-अपने गांवों की समस्याओं को अन्य ‘इंटरनेट साथी’ महिलाओं के साथ साझा किया.

पत्रकारिता की वर्कशॉप में शामिल हुई ‘इंटरनेट साथी’

गाँव कनेक्शन फाउन्डेशन के डीएनई अरविन्द शुक्ला ने इस मौके पर इंटरनेट साथियों को मिले मोबाइल और इंटरनेट कनेक्शन की अहमियत बताते हुए कहा – “आप लोगों के हाथ में जो मोबाइल है वो आपके गांव की आवाज़ और आपकी कमाई का जरिया बन सकता है। अभी आप इससे लोगों को जागरुक करते हैं. अब आप गांव कनेक्शन के स्वयं प्रोजेक्ट के तहत कम्यूनिटी जर्नलिस्ट (नागरिक पत्रकार) बनकर उद्दमी भी बन सकती हैं, अख़बार में अपने गांव और इलाके की ख़बरें लिख सकती हैं और अख़बार की वितरक बनकर अपनी कमाई को बढ़ा सकती हैं”

गूगल, टाटा ट्रस्ट के साथ मिलकर अब तक यूपी के सीतापुर समेत 10 जिलों में 1700 ‘इंटरनेट साथी’ प्रशिक्षित कर चुका है आगे भी ये मुहिम जारी रहेगी। आगे योजना है कि हर इंटरनेट साथी अपने इलाके की 1000 महिलाओं को इंटरनेट आदि के लिए जागरुक करेंगी।

समारोह के दौरान इंटरनेट साथी के सीतापुर में प्रोजेक्ट कॉर्डिनेटर सुरेंद्र कुमार तिवारी ने बताया “हमारे जिले में करीब 260 इंटरनेट साथी हैं, जिनमें 70-75 फीसदी इंटरनेट साथी (छात्राएं और घरेलू महिलाएं ) हैं काफी सक्रिय हैं। इन्होंने कुछ ही दिनों में मोबाइल और इंटरनेट की बारियों को समझ लिया है। अगर ये गांव कनेक्शन से जुड़ती हैं तो इनके लिए एक और अवसर होगा जो उन्हें आगे बढ़ने में मदद करेगा”

इंटरनेट साथी के चैनल और ट्रेनर पार्टनर गोविंद प्रसाद तिवारी ने बताया “हम लोग एक ग्राम पंचायत में एक इंटरनेट साथी चुनते हैं, महिलाओं और लड़कियों से बात करते हैं, उनमें जो रुचि लेते हैं थोड़ी तेजतर्रार होती हैं उन्हें इंटरनेट के इस्तेमाल की ट्रेनिंग देते हैं। और ट्रेनिंग के दौरान ही उन्हें इंटरनेट किट (टेबलेट, मोबाइल) देते हैं। साथ ही दौड़-भाग होने वाले खर्च के रुप में 1000 रुपये का भत्ता भी देते हैं”

इंटरनेट साथियों के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में रेनू वर्मा, गोल्डी वर्मा, आरती देवी, माबिया, उमा पांडेय, सरिता देवी, ज्योति वर्मा, बबली, भारती, वंदना विश्वकर्मा, पिंकी वर्मा, निर्मलादेवी, नीलू रावत, श्रृद्धा दीक्षित, पार्वती पांडेय, हसीना बेगम, रेनू देवी और रुबीना समेत 35 महिलाओं ने हिस्सा लिया।

बीहड़ में रहने वाले ये महिलाएं भले ही सुविधाओं से दूर हों पर इंटरनेट साथी बनकर ये अब दुनिया के कुछ और क़रीब आ गई हैं.


This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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