स्वस्थाध्याय गरीबों के लिए संजीवनी 

Devanshu Mani TiwariDevanshu Mani Tiwari   4 March 2017 1:29 PM GMT

स्वस्थाध्याय गरीबों के लिए संजीवनी कालोनी में लगे स्वास्थ्य शिविर में डॉक्टर कर रहे हैं इलाज।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। मनकू प्रसाद (50 वर्ष) रिक्शा चलाक हैं, कुछ वर्षों पहले पैर में घाव हो गया था, जिससे अचानक रिक्शा चलाते वक्त घाव के स्थान पर उन्हें तेज़ दर्द होने लगता था। एक दिन रिक्शा कालोनी में लगे स्वास्थ्य शिविर में उन्होंने डॉक्टर से अपनी परेशानी बताकर इलाज करवाया। आज वो पूरी तरीके से ठीक हो गए हैं।

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मनकू का इलाज कर चुके डॉक्टर रूपेंद्र कुमार ने बताया, “लखनऊ के आलमबाग क्षेत्र में रिक्शा कालोनी में लगे ‘स्वस्थाध्याय’ शिविर में हमने मनकू का इलाज किया था। मनकू के पैर में वाइटल स्किन डिसआर्डर था, उनकी स्किन सर्जरी करवानी पड़ी। इस सर्जरी की लागत 30,000 रुपए आई थी, जो मनकू को पूरी तरह से मुफ्त दी गई थी।’’लखनऊ जिले के लोकबंधु राज नारायण अस्पताल में अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट डॉ. रूपेंद्र कुमार पूरे जिले में झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले गरीब लोगों, भिखारियों और रिक्शा चालकों को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने के लिए स्वस्थाध्याय पहल चला रहे हैं। इस पहल के अंतर्गत मामूली बुखार के उपचार से लेकर स्किन सर्जरी जैसी बीमारियों का इलाज मुफ्त में किया जाता हैं। स्वस्थाध्याय के अंतर्गत अभी तक 5,000 से अधिक गरीब वर्ग के लोगों का सफलता से इलाज किया जा चुका है।

स्वस्थाध्याय की मदद से अभी तक जिले में अलीगंज, आलमबाग, महानगर, गोमतीनगर स्लम एरिया सहित कई गाँवों में रहने वाले लोगों को नि:शुल्क इलाज दिया जा चुका है। इलाज के दौरान लोगों को मुफ्त भोजन भी दिया जाता है।
अशुतोष कुमार राय, संचालक स्वस्थाध्याय

लखनऊ का खरगापुर क्षेत्र झुग्गी-झोपड़ियों का इलाका है। यहां रहने वाली कमला देवी (52 वर्ष) ने हाल ही में स्वस्थाध्याय की मदद से बच्चादानी का नि:शुल्क ऑपरेशन करवाया है। प्राइवेट अस्पताल में बच्चादानी के ऑपरेशन का खर्च 50,000 से 55,000 तक होता है। स्वस्थाध्याय के माध्यम से विभिन्न रोगों के इलाज के बारे में डॉ. रूपेंद्र कुमार आगे बताते हैं, ‘’इस पहल की मदद से हम त्वचा रोग, ह्दय रोग, सांस की दिक्कत से लेकर महिलाओं की बड़ी समस्याओं और मामूली रोगों का इलाज करते हैं। अभी यह पहल मुख्य रूप से लखनऊ में ही चलाई जा रही है।’’स्वस्थाध्याय की रिपोर्ट के मुताबिक लखनऊ में 3,500 झुग्गी झोपड़ी वाले क्षेत्र हैं, जिनमें करीब तीन लाख से अधिक लोग रहते हैं।

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