तापमान के साथ ही बढ़ी किसानों की चिंता

Divendra SinghDivendra Singh   26 Feb 2017 4:02 PM GMT

तापमान के साथ ही बढ़ी किसानों की चिंतादिन में तेज़ धूप और रात में गिरते तापमान ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

मान्धाता (प्रतापगढ़)। दिन में तेज़ धूप और रात में गिरते तापमान ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है, अगर ऐसा ही रहा तो दलहन और तिलहन की फसल के उत्पादन पर असर पड़ेगा।

प्रतापगढ़ जिला मुख्यालय से दक्षिण दिशा में मान्धाता ब्लॉक के खरवई गाँव के किसान भगीरथ सरोज (55 वर्ष) ने चार बीघे में पछैती मटर बोई है, अभी मटर में फूल आ रहे हैं, तेज़ हवा और तेज़ धूप से मटर की फसल में नुकसान हो रहा है। यही नहीं फसल में कीट भी लगने लगे हैं।

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भागीरथ सरोज बताते हैं, “प्रतापगढ़ में नीलगाय और जंगली सूअर के कारण वैसे भी दाल वाली फसलें कम हो गयी हैं, हम लोग दिन-रात रखवाली करके किसी तरह खेती करते हैं। ऐसे में अब बदले मौसम ने परेशानी बढ़ा दी है।”

वो आगे कहते हैं, “जो पहले मटर बोई थी उसे तोड़कर बाजार में बेच दिया है, अभी देर से बोई गयी फसल में फूल आ रहे हैं। धूप तेज होने से फूल मुरझा जा रहे हैं जबकि कई बार सिंचाई भी की है।” यही नहीं मटर की फसल में फली भेदक कीट का भी प्रकोप बढ़ गया है।

राजा दिनेश सिंह कृषि विज्ञान केंद्र कालाकांकर के प्रमुख वैज्ञानिक एके श्रीवास्तव कहते हैं, “पिछले कुछ दिनों से तेज पछुआ हवा चल रही है, इसका असर तिलहन की फसल पर कम होगा क्योंकि इस समय ज्यादातर फसल में फली लग गयी है, लेकिन देर से बोई मटर की फसल जिसमें फूल आ रहे हैं, उनमें नुकसान हो सकता है। वो आगे कहते हैं, “मटर की फसल में किसानों को सिंचाई कर लेनी चाहिए, जिससे उसमें नमी बनी रहे।”

पिछले कुछ दिनों से तेज पछुआ हवा चल रही है, इसका असर तिलहन की फसल पर कम होगा क्योंकि इस समय ज्यादातर फसल में फली लग गयी है, लेकिन देर से बोई मटर की फसल जिसमें फूल आ रहे हैं, उनमें नुकसान हो सकता है।
एके श्रीवास्तव, प्रमुख वैज्ञानिक, राजा दिनेश सिंह कृषि विज्ञान केंद् कालाकांकर

दलहनी फसलों की सिंचाई कर नमी बनाए रखें

पछुआ हवा का असर गेहूं की फसल पर भी पड़ेगा। डॉ. श्रीवास्तव गेहूं की फसल के बचाव के बारे में बताते हैं, “इस समय गेहूं की फसल की सिंचाई की जरूरत होती है। तेज हवा के कारण किसान गेहूं की फसल की सिंचाई दिन में न करें क्योंकि इससे फसल गिर सकती है। सिंचाई करनी है तो शाम या रात में करें, जब हवा की रफ्तार कम रहती है, लेकिन सिंचाई हल्की ही करें।”

मटर की फसल को फली भेदक कीट से बचाएं

यही नहीं मटर की फसल में फली भेदक कीट का भी प्रकोप भी बढ़ गया है। इससे बचाव के बारे में डॉ. श्रीवास्तव कहते हैं, “मटर में फली छेदक कीट की रोकथाम के लिए वेसिलस थूरिजजिएन्सिस की कार्स्टकी प्रजाति 1.0 किग्रा या फिर मैलाथियान 50 प्रतिशत ईसी की 2.0 लीटर मात्रा का 500-600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।”

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