शिक्षकों का वेतन दस गुना, स्कूल चलाते हैं शिक्षामित्र

Meenal TingalMeenal Tingal   7 Feb 2017 12:02 PM GMT

शिक्षकों का वेतन दस गुना, स्कूल चलाते हैं शिक्षामित्रशिक्षामित्रों का आरोप, हस्ताक्षर कर गायब हो जाते हैं सरकारी शिक्षक

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। शिक्षामित्रों की तनख्वाह 3500 रुपये, जबकि सरकारी शिक्षकों को करीब 30 हजार रुपये मिलते हैं, लेकिन कई स्कूलों में ज्यादातर काम इन्हीं से करवाया जा रहा है। शिक्षामित्रों का आरोप है कि शिक्षक ज्यादातर किसी न किसी काम का बहाना बनाकर गैर हाजिर रहते हैं और उन्हें ही पूरा स्कूल संभालना पड़ता है।

यूपी सरकार ने बीते वर्ष हजारों शिक्षामित्रों को समायोजित कर शिक्षक बना दिया था, लेकिन प्रदेश के 27 हजार शिक्षामित्र असमायोजित हैं। लखऩऊ के ऑठ ब्लॉक में 1343 शिक्षामित्र हैं, जिनमें से कई ने गांव कनेक्शन से अपने मन की बात साझा की है कि सरकारी शिक्षकों की हीलाहवाली के चलते शिक्षक की पूरी जिम्मेदारी उन पर आ गई है, सबसे ज्यादा शिकायतें कॉकोरी ब्लॉक से मिली हैं। ब्लॉक के 107 स्कूलों में 200 शिक्षामित्र हैं, जिनमें से 130 का समायोजन नहीं हुआ है।

प्राथमिक स्कूल नरौना, काकोरी में पढ़ाने वाले शिक्षामित्र मोहित तिवारी ने बताया, “अब तक मेरा समायोजन नहीं हुआ है और मानदेय के रूप में मुझे केवल पैंतीस सौ रुपये मिलते हैं। मेरे स्कूल के दूसरे शिक्षकों की सैलरी कम से कम 35 हजार है, लेकिन वो अक्सर स्कूल नहीं आते है और अगर आते हैं तो साइन कर निकल जाते हैं।” वहीं प्राथमिक विद्यालय दसदोई की प्रधान अध्यापिका पर आरोप है कि वो सिर्फ हस्ताक्षर कर वापस चली जाती हैं।

कई दूसरे स्कूलों से ऐसी शिकायतें भी मिली हैं। इसी स्कूल के शिक्षामित्र ने बताया, "प्रधानाध्यापिका अक्सर हम लोगों के सहारे स्कूल को छोड़कर चली जाती हैं।” कई दूसरे स्कूलों के शिक्षामित्रों ने माना ही शिक्षक अक्सर गायब रहते हैं, लेकिन सरकारी नौकरी के लालच और शिक्षकों से अच्छे संबंध बने रहे इसलिए वो शिकायत नहीं करना चाहते।

शिक्षकों के स्कूलों से गायब रहने पर बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रवीण मणि त्रिपाठी कहते हैं, “अक्सर शिक्षकों को स्कूल से सम्बन्धित किसी काम से कहीं न कहीं जाना होता है। ऐसे में रजिस्टर में कारण दर्ज करके वह स्कूल से जा सकते हैं। लेकिन यदि वह अक्सर स्कूल से बिना बताये और बिना रजिस्टर में कारण दर्ज किये स्कूल से कहीं जाते हैं तो उनकी शिकायत लिखित रूप में स्कूल में मौजूद शिक्षामित्र व शिक्षक कर सकते हैं। शिकायत मिलने पर आवश्यक कार्रवाई की जायेगी।”

प्राथमिक विद्यालय गोहरामऊ की शिक्षामित्र कहती हैं, “प्रधान अध्यापिका अंबर फातिमा अक्सर छुट्टी लेकर चली जाती हैं। मैं अकेले ही पूरे स्कूल के बच्चों को पढ़ाती हूं, लेकिन वो वरिष्ठ हैं इसलिए मैं कभी सवाल नहीं करती।” माधवपुर के शिक्षामित्र शिव किशोर दिवेदी कहते हैं, ऐसा तो अकसर ही होता है कि कभी प्रधान अध्यापिका तो कभी शिक्षिका अपने व्यक्तिगत कार्यों से स्कूल से अकसर चली जाती हैं और जिम्मेदारी हम शिक्षामित्रों पर छोड़ जाती है।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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