इस वर्ष भी जैविक खेती को लगेगा बड़ा झटका, यूरिया-डीएपी का अंधाधुंध प्रयोग जारी

इस वर्ष भी जैविक खेती को लगेगा बड़ा झटका, यूरिया-डीएपी का अंधाधुंध प्रयोग जारीबुवाई का रकबा बढ़ने के साथ-साथ किसान इस समय बीज, यूरिया और खाद अधिक खरीद रहे हैं।फोटो: गाँव कनेक्शन

देवांशु मणि तिवारी, स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। पिछले दो वर्षों के सूखे के बाद इस वर्ष सामान्य मानसून ने रबी की बुवाई बढ़ा दी है। रबी फसलों का रकबा बढ़ने से खेती में किसानों द्वारा रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग भी बढ़ रहा है।

रसायनिक खादों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने में इस बार सरकार भी एक बड़ा कारण बन सकती है। सरकार ने अपनी सभी सहकारी समितियों पर बिकने वाली खादों की कीमत 30 फीसदी कम कर दी है, जिससे किसान अधिक से अधिक यूरिया व डीएपी का प्रयोग कर रहे हैं।

रायबरेली जिले के बछरावां क्षेत्र में विशुनपुर गाँव में चार एकड़ खेत में गेहूं की खेती कर रहे किसान रामप्यारे शुक्ल (45 वर्ष) ने बताया कि पिछले साल यूरिया की पचास किलो की बोरी 320 से 350 रुपए में बिक रही थी, वही इस बार 276 से 280 रुपए में बिक रही है इसलिए इस बार गेहूं बुवाई में ज़्यादा दिक्कत नहीं हुई।

केंद्रीय कृषि मंत्रालय के मुताबिक इस बार गेहूं सहित तिलहनी व दलहनी फसलों का रकबा बढ़ रहा है। ऐसे में आने वाले समय में उर्वरकों का प्रयोग और भी बढ़ सकता है। प्रदेश सरकार की मदद से जनपदों में किसानों की मदद के लिए स्थापित किए गए एग्री जंक्शन केंद्रों में से एक रायबरेली (बछरावां) केंद्र के प्रभारी सुनील कुमार बताते हैं कि इस वर्ष जनपद में रबी बुवाई पिछले साल की तुलना में ज़्यादा हुई है।

पांच प्रतिशत बढ़ गया रबी का रकबा

केंद्रीय कृषि मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी किए गए नवीनतम आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्ष जनवरी में रबी बुवाई का रकबा 5.8 करोड़ था, जो इस वर्ष 13 जनवरी तक पांच प्रतिशत बढ़कर 6.1 करोड़ पहुंच चुका है। किसानों को इस सीजन में अधिक मुनाफा मिल सके इसके लिए इफको ने अपनी खाद व डीएपी के दाम कम दिए हैं। बुवाई का रकबा बढ़ने के साथ-साथ किसान इस समय बीज, यूरिया और खाद अधिक खरीद रहे हैं।

रबी फसलों का रकबा बढ़ने से खेती में किसानों द्वारा रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग भी बढ़ रहा है। फोटो: गाँव कनेक्शन

बागवानी किसान ज्यादा खरीद रहे रासायनिक खाद

लखनऊ जिले के बड़े खाद विक्रेताओं में से एक जानकीपुरम स्थित लाफोर्ड एग्रो टेक लिमिटेड कंपनी की क्षेत्रीय अधिकारी मुस्कान मिश्रा बताती हैं,‘पिछले वर्ष की तुलना में इस बार किसान ज़्यादा फसल ले रहे हैं। इस बार हमारे पास ज़्यादातर फूलों व बागवानी फसलों के किसान खाद लेने आए हैं, मुख्य तौर पर नाइट्रोबेंज़ीन व पोटेशियम ह्यूमिक एसिड जैसे उर्वरकों की बिक्री काफी मात्रा में हो रही है।’

कृषि मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2014-15 की रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत पूरे देश में मौजूदा समय में 2,047 हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक कृषि की जा रही है। मिशन के तहत खासकर गुजरात, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु व उत्तर प्रदेश में किसान बेहतर ढंग से जैविक खेती कर रहे हैं। ऐसे में प्रदेश में रासायनिक उर्वरकों की खरीद बढ़ने से जैविक खेती पर उल्टा असर पर सकता है।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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