तीन दशक बीतने के बाद भी नहीं मिला किसानों को मुआवजा

तीन दशक बीतने के बाद भी नहीं मिला किसानों को मुआवजामुआवजा न मिल पाने के कारण किसान एलडीए के चक्कर लगाने को है मज़बूर

संतोष कुमार सिंह, स्वयं कम्यूनिटी जर्नलिस्ट

काकोरी (लखनऊ)। सदर तहसील के काकोरी ब्लॉक में आने वाले लखनऊ मुख्यालय से 10 किमी की दूरी पर बसे काकोरी हरदोई रोड बसंतकुंज योजना के किसान जमींन का मुआवजा न मिलने के कारण दयनीय हालात में जीने को मजबूर हैं। यहां के किसानों को तीन दशकों बाद भी मुआवजा नहीं मिला है।

भाजपा, बसपा, सपा सभी पार्टियों की सरकार आई, लेकिन किसी ने हम लोगों की नहीं सुनी। मुआवजा के आस में हम सिर्फ भटकते ही रहे।
प्रभु प्रधान, निवासी, बरावनखुर्द

हम किसान लोग सैकड़ों बार एलडीए आफिस के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन अधिकारी हैं कि हमारी बात नहीं सुनते। वह आगे कहते हैं कि हमारी बेटियां शादी करने के लिए घर बैठी हैं। मुआवजा मिले तो बेटियों के हाथ पीले कर सकें।
घनश्याम,बरावनखुर्द

वर्ष 1981 में लखनऊ विकास प्राधिकरण ने हरदोई रोड पर बसंत कुंज योजना को विकसित करने के लिए बरिकला, बरावन खुर्द, मंसूरनगर और पीरनगर के किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया था। अधिग्रहण के चलते यहां पर खेती किसानी बंद हो गयी और किसान मजदूरी करने लगे। किसानों का कहना है कि 3 दशक बीतने के बाद भी जमीन का मुआवजा नहीं मिला है। हमारी जमीनों में कालोनी, शादीघर और बहुमंजिली इमारतें खड़ी हो गयी हैं, लेकिन जमीन के मुआवजे के लिए एलडीए के चक्कर लगा कर चप्पल तक घिस गये हैं, पर मुआवजा अब तक नहीं मिला।

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