रुपए लेकर प्रशिक्षुओं को आवंटित कर रहे स्कूल

रुपए लेकर प्रशिक्षुओं को आवंटित कर रहे स्कूलहैदरगढ़ क्षेत्र का कॉलेज श्री बैजनाथ शिवकला।

कविता द्विवेदी

स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

हैदरगढ़। बीटीसी प्रशिक्षुओं से प्रशिक्षण के नाम पर घूस ली जा रही है जबकि व्यवस्था यह है कि प्रशिक्षु को आसपास कालेज आवंटित किया जाए। आरोप है कि हैदरगढ़ क्षेत्र के कॉलेज श्री बैजनाथ शिवकला में प्रत्येक प्रशिक्षु से 500 रुपए लिए जा रहे हैं और कई स्कूलों में 500 की जगह 700 रुपए लिए जा रहे हैं, जिसमें 200 रुपए स्कूल की जेब में जाते हैं।

बीटीसी दो साल की पढ़ाई होती है, जिसमे चार समेस्टर होते हैं और हर समेस्टर में एक महीने का प्रशिक्षण होता है। जिसमें ये बीटीसी प्रशिक्षु किसी भी प्राइमरी स्कूल में एक महीने जाकर बच्चों को पढ़ाते हैं। प्रशिक्षुओं को उनकी सुविधानुसार घर के पास का स्कूल आवंटित किया जाता है। प्रशिक्षु नीरज सिंह बताते हैं, “प्रशिक्षुओं को मर्जी का स्कूल देने के लिए उनसे 700 या 500 रुपये लिए जाते हैं और जो ये रुपए देने से मना करते है उन्हें दूर का स्कूल दे देते हैं। जैसे कोई हैदरगढ़ का रहने वाला हो तो उसे फतेहपुर दे देते हैं।” वो आगे बताते है, “ये रुपए कालेज से डायट के बाबू के पास जाता है और उसमें बेसिक शिक्षा अधिकारी को भी हिस्सा मिलता है।”

हैदरगढ़ के श्री बैजनाथ शिवकला कालेज की छात्रा शालू वर्मा (22 वर्ष) बताती हैं, “प्राचार्य अमरेश सिंह ने बीटीसी प्रशिक्षुओं से कहा कि आप सभी लोग 700 रुपए दे दीजिए जो बाराबंकी डायट गनेशपुर जाएगा। वहां से आपको अपने आसपास का स्कूल आवंटित हो जाएगा और जो लोग नहीं देंगे उनको दूर का स्कूल मिल सकता है।”

वो आगे बताती हैं, “ये स्थिति इसी स्कूल की नहीं बल्कि पूरे बाराबंकी के बीटीसी कालेज की है और प्रशिक्षु डर के कारण रुपए जमा कर देते हैं। क्योंकि जो बच्चे बाहर से यहां कमरा लेकर रहते हैं वो इधर-उधर कहां जाएंगे क्योंकि उनके लिए ये शहर अंजान है।”

प्रशिक्षु जितेन्द्र तिवारी बताते हैं, “बीटीसी एडमिशन में जिन बच्चों को सरकारी कालेज मिलता है उनको 12,000 रुपए साल के और जिन बच्चों को प्राइवेट कालेज मिलता है उनको 41000 रुपए सालाना फीस देनी पड़ती है। ये सरकार द्वारा निर्धारित होती है। मगर प्राइवेट कालेज के जो बच्चे हैं उनसे कालेज के प्राचार्य कहीं 15,000 या कहीं 20,000 रुपए अतिरिक्त ये कहकर लेते हैं कि ये मैनेजमेंट फीस है कालेज की, जबकि वो इस तरह अपने कालेज की सुविधाओं का किराया लेते हैं ये रुपए केवल प्राइवेट कालेज में लिया जाता है।” इस मामले में जब बीएसए बाराबंकी टीएन सिंह से बात करने की कोशिश की गई तो पता चला कि वो अभी छुट्टी पर दो दिन बाद बात होगी।

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