ट्रे नर्सरी के पौधों से किसान बढ़ा सकेंगे सब्जियों का उत्पादन

ट्रे नर्सरी के पौधों से किसान बढ़ा सकेंगे सब्जियों का उत्पादनलगभग 25 फीसदी बढ़ता है फसल उत्पादन, बढ़ता है किसानों का मुनाफा। फसल में रोग और कीट लगने का खतरा है कम।

सुधा पाल, स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। प्रदेश के किसान अब सब्जियों की खेती से ही अपनी आय दोगुना कर सकेंगे, उन्हें अतिरिक्त आय के लिए अन्य किसी खेती पर निर्भर नहीं होना पड़ेगा।

बागवानी विशेषज्ञों का दावा है कि ट्रे नर्सरी में तैयार किए गए पौधे जमीन में तैयार की गई नर्सरी के पौधों के मुकाबले फसलों के उत्पादन और उनकी गुणवत्ता में बेहतर हैं। इसके साथ ही इन पौधों के उपयोग से तैयार होने वाली सब्जियों की फसल में रोग और कीट का प्रकोप कम हो जाता है।

प्रदेश में बस्ती जिले के उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के कृषि प्रसार अधिकारी डॉ. केएम चौधरी बताते हैं, “इस ट्रे तकनीक से जो पौधे तैयार किए जाएंगे वे रोगमुक्त होंगे और उनमें किसी भी तरह का कोई कीट नहीं होगा। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि वे पौधे जमीन पर नहीं बल्कि ट्रे में लगेंगे। इसके साथ ही इन पौधे के उपयोग से फसल को काफी फायदा होगा और किसानों को भी।”

डॉ. चौधरी आगे बताते हैं “किस्मों की गुणवत्ता में जहां सुधार आएगा और उनका उत्पादन बेहतर होगा वहीं किसानों की भी आमदनी बढ़ेगी।” इन सब्जियों के लिए तैयार की जा सकती है नर्सरी- बैगन, शिमला मिर्च, गोभी, टमाटर, मिर्च, टमाटर, प्याज आदि।

बागवानी विभाग किसानों को इसके लिए प्रेरित करेगा। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में इससे संबंधित प्रशिक्षण भी देश भर से आए किसानों को दिया जाएगा। इसके साथ ही नर्सरी से तैयार पौधों को किसानों को दिया जाएगा और वे इससे पारंपरिक फसलों को मुकाबले ज्यादा लाभ कमा सकेंगे।
राजमणि शर्मा, जिला उद्यान अधिकारी (बस्ती, उप्र)

इस तरह से तैयार करें नर्सरी के लिए विशेष खाद

डॉ. के. एम चौधरी का कहना है कि इस तकनीक में वर्मीकुलाइट, कोकोपीट और गोबर खाद का उपयोग किया जाता है। इन तीनों को मिलाकर खाद तैयार की जाती है। इसमें मिट्टी का उपयोग नहीं किया जाता है इसलिए मिट्टी से होने वाले संक्रमण से पौधे सुरक्षित होते हैं। कोकपीट में नारियल के बुरादे का उपयोग किया जाता है जो भुरभुरा होता है और इसमें नमी बराबर बनी रहती है। इसके साथ केचुए से तैयार वर्मीकुलाइट पौधों के विकास के लिए जरूरी पोषक तत्व देते हैं।

ट्रे नर्सरी क्या है और क्यों है बेहतर

प्लास्टिक के बर्तन (ट्रे) में वैज्ञानिक तरीके से सब्जियों के बीज लगाए जाते हैं। जिसके बाद उसमें विशेष तरह की खाद का मिश्रण डालकर संतुलित पानी अौर तापमान पर पौधे तैयार होने के लिए रख दिया जाता है। ट्रे नर्सरी तैयार करने के बाद पौधों को आसानी से पूरी जड़ के साथ निकाला जा सकता है जबकि जमीन में लगाई गई नर्सरी से पौधों को जड़ से निकालते समय उनकी जड़ें टूट जाती हैं जिससे फसल आने में 15 दिन का समय बढ़ जाता है।

इस तरह इस तकनीक में जड़ों का विकास भी बेहतर होता है। नर्सरी से निकालने के बाद इन पौधों को 5 से 10 दिनों के अंदर आराम से लगाया जा सकता है लेकिन साधारण तौर पर तैयार की गई नर्सरी के पौधों को अगर इतने दिन रखा जाए तो वे मुर्झा जाएंगे। इसके साथ ही इस विधि से होने वाली फसलों का उत्पाद भी एक समान रहता है।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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