आंगन में अब कम ही नजर आता है तुलसी का पौधा

आंगन में अब कम ही नजर आता है तुलसी का पौधातुलसी का पौधा ।

अजय सिंह चौहान, स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

लखनऊ। तेजी से हो रहे विकास के करण वातावरण में कई बदलाव हो रहे हैं। ऐसे में कुछ अमूल्य वनस्पतियां विलुप्त हो रही हैं। वातावरण में हुए असंतुलन की वजह से तुलसी के पौधे विलुप्त होते जा रहे हैं। यह समस्या शहर के साथ अब गांवों में भी बढ़ रही है। आज कल बहुत कम घरों में तुलसी के पेड़ नजर आते हैं, जबकि इसका आध्यात्म के साथ चिकित्सीय क्षेत्र में भी काफी महत्व है।

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हर्बल जानकार डॉ. रामशरण बाजपेई (50वर्ष) ने बताया, ‘आयुर्वेद में तुलसी को जीवनदायी पौधा कहा गया है। इससे पानी और वायु दोनों साफ होते हैं। पहले घरों में इसलिए इसे लगाया जाता था। इसकी कुछ पत्तियां सांस से जुड़ी बीमारियों खांसी ,जुक़ाम आदि में लाभदायक हैं। इसमें कई रसायन और मिनिरल्स होते हैं, जो मानव शरीर के लिए लाभकारी है। बावजूद इसके भी अब तुलसी का पेड़ घरों में कम दिखाई देता है।’

जानकीपुरम यूनाइटेड सिटी कॉलोनी की निवासी रेखा सिंह(38वर्ष) ने बताया, ‘अब बहुत कम लोग इस पौधे का रोपड़ करते हैं। पहले तो विवाह होने पर खाने में इसकी कुछ पत्तियां डाल देते थे। लोगों का मानना था कि इससे खाना कम नहीं पड़ेगा। सर्दियों में इसकी पत्तियों से बने काढ़े को लोग पीते थे। मैंने आज भी अपने आँगन में मिट्टी के गमले में तुलसी का पेड़ लगा रखा है। लेकिन आज के युवा इस पौधे के महत्व को पहचान नहीं पा रहे हैं।’ यूनाइटेड सिटी कॉलोनी की रहने वाली रचना कुंजन(45वर्ष) बताती हैं, ‘आज भी बहुत से घरों में तुलसी के पौधे लगाये जाते हैं। बल्कि विधि विधान से उनकी पूजा अर्चना भी की जाती है।

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