सिंचाई करें, मगर गिरते जलस्तर का भी ध्यान रखें

सिंचाई करें, मगर गिरते जलस्तर का भी ध्यान रखेंभूगर्भ जल के अधिकाधिक दोहन से कई गाँवों में पेयजल संकट गहरा गया है।

उपदेश कुमार, स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

कानपुर। तालाब, जलाशयों, झीलों आदि में पानी न भरने और भूगर्भ जल के अधिकाधिक दोहन से कई गाँवों में पेयजल संकट गहरा गया है। विकास खंड के अफसरों की मानें तो बीते 35 दिनों में कई ग्राम पंचायतों के इंडियामार्का नल, सबमर्सिबल पंप और नलकूपों ने पानी देना बंद कर दिया है। रिबोर के बाद भी उक्त जल स्त्रोतों से पानी नहीं आ रहा है। सिंचाई विभाग के अफसरों की मानें तो जायद मक्का के लिए किसानों द्वारा बहुत ज्यादा पानी निकाल लिए जाने से एकाएक यह समस्या आई है।

अरौल, हिलालपुर, गांगूपुर, आंकिन, मिडुआ, बकोठी, संती, नानामउ, महिगवां, ददिखा, ढाकापुरवा, हनुमानपुरवा, मोहद्दीनपुर, शाहमपुर कोट, अनूपपुरवा, पिहानी, रौगांव, मकनपुर, बारंडा सहित क्षेत्र के सैकड़ों गाँवों के किसानों ने इसबार काफी बड़े क्षेत्रफल में जायद मक्का की फसल की है। इस कारण मक्का की सिंचाई के लिए हजारों ट्यूबवेलों, नलकूपों और सबमर्सिबल पंपों से फसल की सिंचाई की गई है।

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जायद मक्का में सामान्य मक्का के सापेक्ष कई गुना अधिक सिंचाई के लिए पानी की जरूरत होती है। विभाग के पास इसके नियंत्रण के लिए कोई स्पष्ट शासनदेश नहीं है। किसानों को स्वयं इस पर विचार कर जल संरक्षित करना चाहिए।
मनीष कुमार, जिला कृषि अधिकारी

खासपुर गाँव के किसान गिरीश कटियार (40 वर्ष) ने बताया, “350 रुपए प्रतिकिलो बीज खरीदकर मक्का की फसल बोई थी, लेकिन इंजन फेल होने से मैं समय पर फसल की सिंचाई नहीं कर सका।” फसल की सिंचाई कर रहे किसान पिहानी गाँव के किसान रामसनेही बताते हैं, “गर्मियों में होने वाली मक्का में बहुत पानी लगता है यही कारण है पानी का स्तर नीचे जा रहा है।” सरकारी हैंडपंप से पानी भर रहे बारंडा गाँव के किसान कमलेश पाल (45 वर्ष) ने बताया, “बड़े पैमाने पर मक्का की सिंचाई जलस्तर नीचे चला गया और घर की सबमर्सिबल खराब हो गई है। रिबोर भी कराया, लेकिन फिर भी पानी नहीं निकला।”

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