मौसम की मार से आम की फसल प्रभावित, कीमत बढ़ने के आसार 

मौसम की मार से आम की फसल प्रभावित, कीमत बढ़ने के आसार हवा चलने से बागों में गिरे कच्चे आम एकत्रित करते किसान।

देवांशु मणि तिवारी, स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। बीते कुछ दिनों से चल रहे तेज़ हवाओं के कारण आम की खेती कर रहे किसानों पर मौसम की मार पड़ी है। इसके कारण किसानों को कच्चे आम कम कीमत में बेचने समेत बाग की निगरानी के लिए अलग से श्रमिक खर्च वहन करना पड़ रहा है। मौसम की मार के कारण ही पूरे देश में आम के लिए मशहूर क्षेत्र महिलाबाद में भी किसानों के चेहरे मुरझाए हुए हैं। क्षेत्र में इस वर्ष किसानों को 25 फीसदी आम की पैदावार ही मिल पाई है। इसके साथ साथ क्षेत्र में लकड़ी की आरा मशीनों पर रोक लग जाने के बाद लकड़ी की पेटियां मिलना भी मुश्किल हो गया है।

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इस बाबत किसान बताते हैं कि प्लास्टिक का कैरेट 250 से 300 रुपए का मिलता है और लकड़ी की पेटियां 25 से 30 रुपए में मिल जाती हैं। जब किसान का खर्चा बढ़ेगा, तो वो मंडी में आम भी महंगा बेचेगा। आपको बता दें कि देश के कुल आम उत्पादन का 25 फीसदी हिस्सा उत्तर प्रदेश का है। प्रदेश में मुख्य रूप से दशहरी, बनारसी, आम्रपाली, चौसा और लंगड़ा जैसे आमों की किस्मों की खेती बड़े स्तर पर की जाती है। लखनऊ के आम निर्यातकों में शामिल बड़े व्यवसायी विनय शुक्ला प्रत्येक वर्ष खुद की कंपनी की मदद से जापान, अमेरिका, यूएई, ओमान और कुवैत जैसे देशों में आम की खेप भेजते हैं।

इस वर्ष आम की पैदावार को देखते हुए बड़े व्यापारियों के साथ साथ किसान चिंतित हैं। ब्लॉक में पेड़ों के अवैध कटान को रोकने के लिए आधे से ज़्यादा आरा मशीनों को छापा मारकर बंद करवा दिया गया है। इससे हम लोगों को लकड़ी की पेटियां नहीं मिल पा रही हैं।
अवधेश कुमार सिंह, किसान, अमलौली गाँव, मलिहाबाद

किसान विनय बताते हैं,’’ मलिहाबादी दशहरी की मांग विदेशों में बढ़ी है, हालांकि इसका लाभ बड़े किसानों को ही कुछ हद तक मिल पाएगा। छोटे किसान अभी भी दिक्कत में हैं। आम मंडी ले जाने पर मंडी शुल्क, गाड़ी का किराया, डीजल का खर्चा और आम तोड़ाई का लेबर भाड़ा अलग से चुकाना पड़ता है।’’

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मंहगे कृषि यंत्रों से बढ़ा आम तोड़ाई का खर्चा

लखनऊ के भगतपुरवा गाँव निवासी किसान राकेश कुमार यादव डेढ़ बीघे में आम की खेती कर रहे हैं। राकेश बताते हैं,’’ पिछले तीन-चार वर्षों से आम की खेती से जुड़े यंत्र और सामान महंगे होते जा रहे हैं। इससे किसानों का अनावश्यक खर्चा बढ़ा है। आम तोड़ाई के काम आने वाली लग्घी, खोइंचा और पेटी के दाम पिछले वर्ष से डेढ़ गुना बढ़ गए हैं। इससे किसान और व्यापारी दोनों परेशान हैं।’’

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