व्हाट्सएेप की मदद से पशुपालक खुद ही कर रहे हैं पशुओं का उपचार 

Diti BajpaiDiti Bajpai   12 May 2017 4:08 PM GMT

व्हाट्सएेप की मदद से पशुपालक खुद ही कर रहे हैं पशुओं का उपचार पशुपालकों को पशुओं का इलाज करवाने के लिए दूर पशु चिकित्सालयों में भटकने की जरुरत नहीं पड़ती।

स्वयं प्रोजेक्ट

लखनऊ। अब पशुपालकों को अपने पशुओं का इलाज करवाने के लिए दूर पशु चिकित्सालयों में भटकने की जरुरत नहीं पड़ती। पशु वैज्ञानिकों और चिकित्सकों की मदद से अब व्हाट्सऐप पर भी पशुपालकों को जानवरों के उपचार की सलाह दी जाती है। इससे घर बैठे पशुपालक डॉक्टरों की सलाह लेकर अपने पशुओं का इलाज कर रहे हैं।

मुज़फ्फरपुर जिले के जीतेन्द्र कुमार(35 वर्ष) बताते हैं, “जब पशुपालन शुरू किया था तब व्हाट्सएप पर बने ‘पशुपालन सम्बंधित जानकारी’ ग्रुप की काफी मदद मिली। ग्रुप में कई तरह के किसान है वो भी मदद करते है। साथ ही साथ डॉक्टर और वैज्ञानिक भी है जो इस समय-समय नई-नई जानकारी देते है।” जितेंद्र पिछले एक वर्ष से जितेंद्र पशुपालन कर रहे है। उनके पास दो गाय और एक बछिया है।जितेंद्र आगे बताते हैं, “इस ग्रुप के अलावा मैं और चार ग्रुप में जुड़ा हुआ हूं। इन ग्रुपों में अलग-अलग राज्यों के वैज्ञानिक और पशुपालक जुड़े हुए है।”

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तकनीक की मदद से किसानों को फायदा मिले और उपज बढ़े। इसके लिए किसान नए-नए तकनीकों को अपना रहा है। डिजि़टलीकरण के दौर में देश के किसान अब पीछे नहीं हैं। ख़ुद को आगे लाने के लिए संचार क्रांति से जुड़ गए हैं। देश के कई इलाक़ों में अलग-अलग नाम से किसानों के व्हाट्स एेप ग्रुप बन गए हैं तो कही किसान एेप के जरिए जानकारी प्राप्त कर रहे हैं।

मथुरा जिले के तेजपाल सिंह(64 वर्ष) पिछले कई वर्षों से डेयरी चला रहे है। उनके पास 100 पशु है। अगर उनके पशुओं को कोई समस्या होती है तो वो ग्रुप के जरिए हल कर लेते है। तेजपाल बताते हैं, “मैं दो साल से पांच ग्रुप से जुड़ा हुआ हूं जो भी छोटी-मोटी बीमारी होती है उसकी फोटो खिंचकर ग्रुप में डाल देते हूं, समूह से दवा की जानकारी हो जाती है।”

साभार: इंटरनेट

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ग्रुप से मिलती रही है जानकारी

मध्यप्रदेश के उमरिया जिले में रहने वाले राहुल कटियार(30 वर्ष) बताते हैं, “अभी कुछ दिन पहले मैंने व्हाट्सएप ग्रुप पर एक प्रश्न पूछा था। ‘मेरे पास एक जमुनापरी बकरी और एक तोतापरी बकरी है जो कि सरकारी विभाग से मिली है। मैं उसे सब बकरी की तरह ही मसूर और चने का भूसे की सानी देता हूं क्योंकि हमारे यहाँ चराने की जगह नहीं है लेकिन वो बहुत कमजोर हो गई है उनकी उम्र लगभग आठ माह है। क्या कोई बता सकता है कि उनको और क्या दू जिस से वह मोटे हो और अधिक खाएं।’ इस तरह से प्रश्न पूछते और जवाब भी मिलता है।”

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