कृषि क्षेत्र में अलग करने वाली महिलाओं को मिला सम्मान 

कृषि क्षेत्र में अलग करने वाली महिलाओं को मिला सम्मान महिलाओं को जैविक खाद बनाने का प्रशिक्षण दे रही हैं।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। मुन्नी देवी जब ब्याहकर ससुराल आयीं तो घूंघट के बिना घर से भी निकलना मुश्किल था, लेकिन आज वहीं मुन्नी देवी सैकड़ों महिलाओं को जैविक खाद बनाने का प्रशिक्षण दे रही हैं। ऐसी ही कृषि क्षेत्र में अलग करने वाली पांच महिला किसानों को सम्मानित किया गया।

गोरखपुर एनवायरन्मेंटल एक्शन ग्रुप और आक्सफेम के संयुक्त तत्वाधान में एक दिवसीय महिला किसान सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महिला किसान मुन्नी देवी, इसलावती देवी, कुन्ता देवी, मीरा देवी एवं जगरानी देवी को सम्मानित किया गया।

महिलाओं को देती हैं जैविक खाद बनाने का प्रशिक्षण

शाहजहांपुर जिले के भावलखेड़ा ब्लॉक के जलालपुर गाँव के रहने वाली मुन्नी देवी के साथ ही चार और भी महिला किसानों को सम्मानित किया गया। मुन्नी देवी अपने बारे में बताती हैं, "जब ससुराल आयी तो बिना घूंघट के घर से निकलना भी मुश्किल था, लेकिन जब घर में बंटवारा हुआ तो घर की हालत ठीक नहीं रही। तब मुझे विनोबा सेवा आश्रम के बारे में पता चला तब पति से हिम्मत करके आश्रम में वर्मी कम्पोस्ट बनाने का प्रशिक्षण लिया और प्रशिक्षण खाद बनाने काम शुरू कर दिया।"

महिला किसान मुन्नी देवी, इसलावती देवी, कुन्ता देवी, मीरा देवी और जगरानी देवी को सम्मानित किया गया।

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मुन्नी देवी फसल चक्र और फसल प्रबन्धन को बेहद जरूरी मानती हैं। तीन बीघा में सब्जी व पांच बीघा जमीन में गेंहू व चार बीघा में गन्ने की फसल उगा रहीं हैं, गन्ने के साथ मूंग उर्द मसूर लहसून प्याज आलू सरसों आदि की सहफसली खेती करती हैं जिससे परिवार का खर्च निकल आता है। अब मुन्नी देवी दूसरी महिलाओं को भी वर्मी कम्पोस्ट बनाने का प्रशिक्षण देती हैं।

मिर्च और मेंथा की खेती कर कमा रहीं हैं मुनाफा

अम्बेडकरनगर जिले के चाचीपुर गाँव की रहने वाली महिला किसान इसलावती (42 वर्ष) आज अपने क्षेत्र में सब्जियों की खेती के सफल किसान के रुप में जानी जाती हैं।

अपने सफल किसानी के अनुभव को साझा करते हुए इसलावती बताती हैं, "मेरे मायके मिर्च की खेती होती थी, जब ससुराल आयी तो यहां पर भी मैंने मिर्च की खेती की शुरु कर दी। आज हम अपने सात बीघा खेत में केवल सब्जी और मेंथा की फसल उगाते हैं।

आज इसलावती घर से ज्यादा समय खेत में बिताती हैं। वो बताती हैं, "खेत में हमारा पूरा परिवार कड़ी मेहनत करता है। खेती कोई घाटे का काम नहीं है, मैंने पिछले साल से अब तक एक लाख का मेंथा ऑयल और 40 हजार का मिर्च बेचा हैं। अभी हर दिन रोज 1000 रू0 का मिर्च, 200 का दूध बेच लेते हैं, वहीं मेंथा हमारा इमरजेन्सी कैश है। आरोह महिला किसान मेच से जुड़ने के बाद तो जैसे स्वाभिमान में भी वृद्धि हुई है।

स्वयं सहायता समूह बनाकर महिला किसानों को देती हैं प्रशिक्षण

गोरखपुर जिले के कैम्पियरगंज के जनकपुर गाँव की महिला किसान मीरा देवी (44 वर्ष) की शादी बहुत कम उम्र में हो गयी, शादी के बाद कुछ साल में पति की मौत के बाद घर की सारी जिम्मेदारी मीरा पर आ गयी। ऐसे में गैर सरकारी संस्था गोरखपुर एनवायरमेंट एक्शन ग्रुप संस्था से जुड़कर मीरा ने खेती करनी शुरु कर दी।

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गोरखपुर एनवायरमेंट एक्शन ग्रुप से जुड़कर किसान विद्यालय समिति से जुड़कर मीरा किसान विद्यालय समिति से जुड़कर कृषि पशुपालन, उद्यान की समस्याओं को इकट्ठा कर मास्टर ट्रेनर और अधिकारी को बुलाकर समस्या का समाधान किया जाता है।

बुंदेलखंड की ये महिला किसान करती है सब्जियों की खेती

ललितपुर जिले से लगभग 31 किमी. दूर बड़ौद गाँव में सहारिया समुदाय के लोग रहते हैं। जिनका मुख्य पेशा मजदूरी और खेती है। गाँव की जगरानी सहारिया (45 वर्ष) बताती हैं, "हमारे गाँव में लोग मजदूरी करके ही खर्चा चलाते थे, लेकिन अब बैंगन, टमाटर, मिर्च की खेती करते हैं। अब हम लोग जैविक खाद का प्रयोग करते हैं।

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