पीलीभीत में कामधेनु डेयरी योजना फेल, अब नई सरकार की ‘गोपालक योजना’ से आस

पीलीभीत में कामधेनु डेयरी योजना फेल, अब नई सरकार की ‘गोपालक योजना’ से आसपीलीभीत में बनी एक गोशाला का दृश्य। 

अनिल चौधरी, स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

पीलीभीत। जनपद में पिछली सरकार के समय शुरू की गई कामधेनु, मिनी कामधेनु व माइक्रो कामधेनु डेयरी योजना मानकों पर खरे न उतरने व विभाग की उदासीनता की वजह से फ्लॉप हो गयी है। प्रदेश की नई सरकार ने अब इन योजनाओं की जगह गोपालक योजना शुरू करने का निर्णय किया है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार गोपालक योजना में प्रति पशुपालक नौ लाख रुपये तक का लोन ले सकता है, जिसे सरकार दो किस्तों में मुहैया कराएगी।

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आमतौर पर पांच या दस पशुओं वाले मध्यमवर्गीय पशुपालकों के लिए लाई गई इस योजना का लाभ लेने के लिए जरूरी होगा कि पशुपालक के पास एक टीन शेड हो। साथ ही योजना का लाभ लेने के लिए पशुपालन विभाग के अधिकारी का अनुमोदन ही मान्य होगा। विभागीय अधिकारी बताते हैं कि दो चरणों में चलने वाली इस योजना के अंतर्गत पहले चरण में पांच पशु और दूसरे चरण में पांच पशुओं को खरीदने के लिए धनराशि दी जाएगी।

एक लाख 80 हजार मार्जिन मनी

गोपालक योजना की कुल लागत नौ लाख रूपए है जिसमें पशुपालक को 10 पशुओं के हिसाब से 1,80,000 रुपये मार्जिन मनी के रुप में माने जाएंगे। इसके बाद पशुपालन विभाग से आवेदन मंजूर होने पर बैंक से पहले साल पांच पशुओं के लिए 3,60,000 रुपये दिए जाएंगे। इसमें यदि पशुपालक केवल पांच पशु ही पालना चाहता है तो उसको दूसरी किस्त नहीं दी जाएगी। पशुपालक अगर पांच पशु और पालना चाहता है तो 3,60,000 रुपये की दूसरी किस्त भी बैंक द्वारा उपलब्ध करा दी जाएगी।

कम पूंजी के पशुपालकों के लिए गोपालक अच्छी योजना है। मात्र 1.80 लाख की धनराशि लगाकर डेयरी खोल सकते हैं। हालांकि अभी जिले का लक्ष्य नहीं मिला। लक्ष्य मिलते ही आवेदन जमा कराए जाएंगे।
ज्ञान प्रकाश सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी।

गोपालक योजना के तहत खुलने वाली छोटी डेयरियों में नौ लाख की लागत में 1,80,000 रुपये पशुपालक को लगाने हैं, बाकि 7,20,000 रुपये पर बैंक 40,000 रुपये प्रतिवर्ष के हिसाब से अनुदान देगा। अनुदान की राशि सीधे गोपालक के बैंक खाते में भेज दी जाएगी। यानी पांच पशु पालने पर एक लाख और दस पशु पालने पर दो लाख अनुदान मिलेगा।

बाहर से पशु लाना आवश्यक नहीं

पिछली सरकार द्वारा शुरू की गई कामधेनु योजना में पशु उत्तर प्रदेश के बाहर से खरीद कर लाने आवश्यक थे, लेकिन गोपालक योजना में ऐसी कोई शर्त नहीं है। पशुपालक अपनी सुविधानुसार कहीं से भी दुधारु पशु खरीद सकता है।

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इस बारे में जब मिनी कामधेनु डेयरी चला रहे ब्लॉक बरखेड़ा निवासी (35 वर्षीय) अन्नू से बात की गई तो उन्होंने बताया, "कामधेनु डेयरी योजना बड़े बजट की योजना थी। इसमें पशुओं को यूपी से बाहर से खरीदकर लाना पड़ता था, जिससे काफी खर्च आता था। कई बार पशु भी मनमाफिक नहीं मिलते थे। दूध का उचित मूल्य व मार्केट न मिल पाने के कारण अधिकतर कामधेनु डेयरियां फेल हो गईं। उन्होंने आशा व्यक्त की है कि गोपालक योजना कम लागत की योजना होने से व अपनी मर्जी से पशु खरीदने की छूट होने के कारण ज्यादा सफल होगी।"

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इसी तरह की बात टांडा विजयशी में कामधेनु डेयरी चलाने वाले गौरव चौधरी ने बताया, "दूध का उचित मूल्य व बिक्री के लिए सही बाजार न मिल पाने से दूध उत्पादन करने पर इतने बड़े बजट की योजना नहीं चलाई जा सकती। लेकिन अब सरकार की गोपालक योजना में छोटी-छोटी डेयरियां खुल जाने से पशुपालकों को दूध की बिक्री शहर में ही घर-घर जाकर की जा सकती है। जिससे गोपालक योजना के सफल होने की संभावना ज्यादा है।”

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