सुप्रीम कोर्ट ने कहा अमीर याचिकाकर्ता भुगतें 50 लाख रुपये

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नई दिल्ली (भाषा)। बड़े उद्योग घरानों द्वारा कमजोर याचिकाओं तथा लंबित मामलों को कम करने के प्रयास में सुप्रीम कोर्ट ने स्टार इंडिया बनाम बीसीसीआई मामले में सुनवाई शुरू होने से पहले सभी पक्षों को 50-50 लाख रुपये जमा करने के लिए कहा है। इस मामले में इन दोनों के अलावा भी कई पक्ष शामिल हैं।

प्रधान न्यायाधीश टीएस ठाकुर और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने कहा, "बड़े मुवक्किलों के लिए मुकदमा महंगा बनाया जाना चाहिए। अटॉर्नी जनरल ने एक ऐसे कदम का सुझाव दिया, जिसे लंबित मामलों को कम करने और मुकदमों को हतोत्साहित करने के लिए अपनाया जा सकता है। यह शुरुआत है।" यह मामला क्रिकेट मैच सूचना के अधिकारों के विवाद से जुड़ा है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला राज्य सभा में न्यायालयों में लंबित मुद्दों पर पूछे गए प्रश्न के एक दिन बाद ही लिया है। सरकार ने 29 अप्रैल को बताया कि पिछले साल में दो करोड़ से अधिक मुकदमों का निस्तारण किये जाने के बावजूद देश के 24 उच्च न्यायालयों एवं निचली अदालतों में तीन करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं।

भारत के प्रधान न्यायाधीश ने 24 अप्रैल को कहा था कि भारत में प्रति 10 लाख लोगों पर 15 न्यायाधीश हैं जबकि विधि आयोग ने करीब 30 साल पहले इस अनुपात को बढ़ाकर प्रति दस लाख लोगों पर 50 न्यायाधीश करने की सिफारिश की थी।

कानून मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा को बताया कि 31 दिसंबर 2015 तक उच्च न्यायालयों में 38.70 लाख मामले लंबित थे जबकि जिला एवं अधीनस्थ अदालतों में 2.70 करोड़ मामले लंबित थे। उन्होंने मामलों के निस्तारण का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2015 में उच्च न्यायालयों ने 15,80,911 मामले निस्तारित किये जबकि निचली अदालतों में ऐसे मामलों की संख्या 1,78,97,488 रही।

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