सुरक्षा के नाम पर वसूली कर रहे निजी स्कूल

सुरक्षा के नाम पर वसूली कर रहे निजी स्कूलgaonconnection

लखनऊ। निजी स्कूल प्राइमरी स्तर पर भारी-भरकम फीस और कापी-किताबों से लेकर ड्रेस तक में स्कूल अपनी मनमानी तो पहले से ही चलाते आ रहे हैं लेकिन अब सिक्योरिटी चार्ज के नाम पर अभिभावकों से मोटी रकम वसूलनी शुरू कर दी है। सिक्योरिटी के नाम पर स्कूल दो हजार रुपए तक की रकम वसूल रहे हैं। 

हर अभिभावक का सपना होता है कि उसके बच्चे शहर के टॉप क्लास स्कूल में शिक्षा प्राप्त करें। उच्चवर्गीय लोगों का यह सपना भले ही साकार हो जाये लेकिन अन्यवर्गीय अभिभावकों का यह सपना बस सपना ही रह जाता है। मध्यमवर्गीय परिवार अपने बजट को ऊपर-नीचे करके किसी तरह से अपने इस सपने को पूरा करने के लिए जद्दोजहद करते रहते हैं लेकिन निजी स्कूलों की मनमानी और अवैध वसूली उनके सामने तमाम मुश्किलें पैदा करती ही रहती हैं।

अभिभावकों कहना है कि स्कूलों की मनमानी मानना हमारी मजबूरी है, कम खायें, कम अच्छा पहने लेकिन अच्छे स्कूलों में शिक्षा दिलाने के लिए हमारी जद्दोजहद जारी है। लेकिन निजी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाना आसान नहीं है। स्कूलों के रोज-रोज के नखरे और हर दिन कोई न कोई मद में वसूली अभिभावकों के लिए इंजीनियरिंग की पढ़ाई से भी महंगी पड़ रही है। कई निजी स्कूल सिक्योरिटी के नाम पर दो हजार रुपए या इससे भी अधिक रकम वसूल रहे हैं।

एक प्राइवेट संस्थान में सीनियर सेल्स एक्जक्यूटिव के पद पर कार्यरत कुमार कहते हैं कि मेरी दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी सिटी मॉन्टेसरी स्कूल में कक्षा एक में पढ़ रही है। इस बार दो हजार रुपए सिक्योरिटी के नाम पर मांगे गए हैं। प्राइवेट नौकरी में काम तो भरपूर लेते हैं लेकिन तन्खवाह काम से काफी कम होती है। उसमें पहले से घर चलाना मुश्किल होता है उस पर ढंग के स्कूल में बच्चे को पढ़ाना सजा के समान है। कभी-कभी तो उधार लेकर फीस भरने तक की नौबत आ जाती है लेकिन इससे स्कूल प्रशासन को कोई लेना-देना नहीं है। उसको तो बस किसी भी तरह से किसी न किसी मद में फीस बढ़ानी है और इसके लिए यदि सवाल किये जायें तो बच्चे को टॉरगेट किया जाता है तो खामोश रहना पड़ता है।

वहीं दूसरी ओर एमजीएम में कक्षा 7 में पढ़ने वाली बच्ची के पिता राजेश कहते हैं कि स्कूल में हजार रुपये सिक्योरिटी के नाम पर देना है। एक तो पहले से ही बच्ची की पढ़ाई बहुत मुश्किल से करवा पा रहे हैं। उस पर हर महीने कोई न कोई नए मद में फीस बढ़ा देते हैं। स्कूल प्रशासन से सवाल करो तो कहते हैं कि स्कूल अपनी जेब से तो लगाएगा नहीं, जहां खर्च होगा तो लिया तो जायेगा ही। राजेश दो टैक्सी चलवाते हैं और उनके दो बच्चे हैं जो एक ही स्कूल में पढ़ रहे हैं। वह कहते हैं कि दोनों बच्चों की फीस में दो हजार रुपए बढ़ गए हैं बहुत दिक्कत में हैं।

इस बारे में अभिभावक कल्याण संघ के अध्यक्ष प्रदीप श्रीवास्तव का कहना है कि कितने आन्दोलन करने के बावजूद सरकार निजी स्कूलों पर नकेल नहीं कस रही है। जब तक सरकार हस्तक्षेप नहीं करेगी अभिभावकों की मुश्किलें कम नहीं होंगीं।

रिपोर्टर - मीनल टिंगल

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