Suvigya Jain

Suvigya Jain

सुविज्ञा जैन प्रबंधन प्रौद्योगिकी की विशेषज्ञ और सोशल ऑन्त्रेप्रनोर हैं।)


  • डरा रहे हैं कम बारिश के पूर्वानुमान

    लखनऊ। बारिश के पूर्वानुमान आने शुरू हो गए हैं। पिछले हफ्ते गैरसरकारी विशेषज्ञ एजेंसी स्काईमेट ने अनुमान लगाया है कि इस साल सात फीसदी बारिश कम होगी। इधर कुछ घंटे पहले ही सरकारी मौसम विभाग ने अपना अनुमान जारी कर दिया है जिसके मुताबिक बारिश तीन फीसदी कम होगी। गौरतलब है कि बारिश के अनुमानों में पांच...

  • 'देश में औसत बारिश का अनुमान हमारे काम नहीं आता'

    बारिश के पूर्वानुमान आने शुरू हो गए हैं। एक गैरसरकारी विशेषज्ञ एजेंसी स्काईमेट का अनुमान है कि इस साल बारिश कम होगी। जबकि गुजरे साल में भी पानी कम गिरा था। इस समय आधा देश सूखे की चपेट में बताया जा रहा है।वैसे तो कुदरत से मिलने वाले जल के मामले में हमारी गिनती जल संपन्न देशों में हैं। लेकिन हम उन...

  • भाजपा का संकल्प पत्र: चुनावी मुद्दों पर असमंजस और बढ़ा

    सत्तारूढ़ दल के घोषणापत्र को लेकर मीडिया में बड़ा कुतूहल था। ज्यादा कुतूहल इसलिए था क्योंकि मुख्य विपक्षी दल ने अपना घोषणाप़त्र एक हफ्ते पहले जारी कर दिया था। हफतेभर से कांग्रेस के घोषणापत्र की चर्चा रोके नहीं रूक रही थी। इसीलिए मीडिया में यह अटकल थी कि ऐन मौके पर भाजपा कोई ऐसा धमाका करेगी जो...

  • घोषणापत्रों में ऊपर आते किसानों के मुद्दों का विश्लेषण भी होना चाहिए

    लखनऊ। कांग्रेस ने अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया है। इसने चुनाव के कई मुद्दे तय कर दिए हैं। अभी सत्तादल और दूसरी पार्टियों के घोषणा पत्र आने बाकी हैं। बहरहाल, मीडिया और आम जनता के बीच कांग्रेस की प्रस्तावित योजना में सबसे ज्यादा कौतूहल न्यूनतम आय योजना को लेकर है। बेशक आकार में यह योजना काफी बड़ी है।...

  • कृषि प्रधान देश में विदेशों से दाल खरीदने के मायने

    देश में हरित क्रांति के बाद से भारतीय कृषि के केंद्र में गेंहू और चावल ही रहे। लेकिन भारतीय भोजन में बहुत बड़ा हिस्सा दालों का भी है। फिर भी कृषि जगत में दालों की चर्चा उतनी नहीं होती। वह भी तब जब हमारा देश दाल उत्पादन में दुनिया में आज भी अव्वल नंबर पर है। दालों के कुल वैश्विक उत्पादन का 25 फीसद...

  • Election 2019 : लोकसभा चुनाव में गाँव और किसान फिलहाल किस मुकाम पर?

    इस समय तक चुनाव के मुख्य मुद्दे दिखने लगने चाहिए थे क्योंकि मतदान शुरू होने में सिर्फ चार हफ्ते बचे हैं। राजनीतिक दलों के घोषणापत्रों का भी अब तक कोई अता-पता नहीं है। फिर भी नेताओं के भाषणों को सुनकर और मीडिया में स्तंभकारों को पढ़कर एक अंदाजा जरूर लगता है कि इस बार के चुनाव में मुख्य मुद्दे...

  • आधा देश सूखे की चपेट में, आखिर क्यों?

    देश में सूखे के नए आंकड़े आ गए हैं। आधा देश इस समय सूखे की चपेट में है। हैरत की बात ये है कि अभी कुछ महीने पहले ही देश में कई जगह बाढ़ की खबरों से मीडिया भरा हुआ था।खासतौर पर केरल में बाढ़ से तबाही हमारे सामने थी। उस समय 'गाँव कनेक्शन के इसी स्तम्भ में एक आलेख लिखा गया था कि 'यही बाढ़ बनेगी सूखे का...

  • रिकॉर्ड कृषि उत्पादन का हासिल क्या?

    पिछले कुछ समय से जब भी कृषि विकास का सवाल उठता है, तब कृषि की उन्नति के पक्ष में उत्पादन बढ़ने का तर्क दिया जाता है। बेशक साल दर साल कृषि क्षेत्र में उत्पादन बढ़ रहा है। सो हर साल रिकॉर्ड टूटना अब आम बात है। अपनी उपलब्धियां गिनाते समय सरकारें अक्सर रिकॉर्ड टूटने का हवाला दिया करती हैं। हाल ही में 5...

  • 'मैनिफैस्टो फॉर चेंज' चिंताशील नागरिकों के एजेंडे में किसान

    सन 2019 कई तरह से खास है। देश के पांच साल के भविष्य के लिहाज़ से तो बहुत ही खास है। दो महीने बाद ही चुनाव होने हैं। राजनीतिक दल अपना अपना एजेंडा बनाने में लगे हैं, लेकिन इसी बीच एक नई बात यह दिखी है कि देश का प्रबुद्ध और चिंताशील समाज भी सक्रिय दिख रहा है। इसका सुबूत यह है कि इसी हफ़्ते देश के एक...

  • बजट 2019 : अंतरिम बजट में गाँव और किसानों को क्या मिला

    बजट पेश कर दिया गया, परंपरा यह रही है कि चुनावी साल में सरकारें अंतरिम बजट लाया करती हैं। अंतरिम बजट में भी ज़्यादातर मौजूदा सरकार अगली सरकार आने तक के लिए वोट ऑन अकाउंट पेश करती है। अगर पूरा अंतरिम बजट पेश भी किया जाता है तो परम्परा के अनुसार उसमें भी बड़े नीतिगत फैसले और टैक्स में बदलाव जैसे फैसले...

  • गरीबों का आरक्षण पास हो गया, मगर इस आरक्षण की पेचीदगियां बड़ा सवाल हैं...

    ग़रीबों को आरक्षण का अचानक प्रस्ताव आया और चट से संसद में पेश हुआ और पट से दोनों सदनों में पास हो गया। बेशक संसद में बहस के बाद पास हुआ है, लेकिन बहस के दौरान इस विधेयक के कई नकारात्मक पहलुओं पर भी कहा सुना गया। इसके विरोध के तर्को में संवैधानिकता और इसकी अहमियत जैसे मुद्दे सामने आए। संवैधानिकता...

  • क्या ये उपाय किसानों की आय वाकई दोगुनी कर पाएंगे?

    हर साल की शुरुआत में कृषि मंत्रालय की तरफ से बीते वर्ष के कृषि क्षेत्र का लेखा जोखा पेश किया जाता है। चलन के मुताबिक इस साल की शुरूआत में कृषि पर उसी तरह की रिपोर्ट प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो ने जारी की है। इस रिपोर्ट में मुख्य रूप से कृषि के लिए बनाई गई सरकारी योजनाओं और प्रयासों का ज़िक्र है। इसमें...

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