Suvigya Jain

Suvigya Jain

सुविज्ञा जैन प्रबंधन प्रौद्योगिकी की विशेषज्ञ और सोशल ऑन्त्रेप्रनोर हैं।)


  • जरूरत है एक और हरित क्रांति की, जो बढ़ाए खाद्यान्नों की गुणवत्ता

    70 के आजाद भारत में कृषि उत्पादन दशक दर दशक बढ़ता ही रहा। इस समय हमारा खाद्य उत्पादन 28 करोड़ टन तक पहुंच गया है। आज हम आत्मनिर्भर हैं। हालांकि यहां तक हम कई उतार चढ़ाव झेलकर पहुंचे हैं। आज भले ही हम खाद्य सुरक्षा के मामले में आत्म निर्भर दिख रहे हैं लेकिन क्या हमें वाकई निश्चिन्त हो जाना चाहिए? इस...

  • दिल्ली के बहाने नए सिरे से प्रदूषण की चिंता और सरकारी उपाय

    दिल्ली एनसीआर की हवा ज़हरीली होती जा रही है। कई चिकित्सक और खुद सरकार, बिगड़ते हालात पर चिंता जता रहे हैं। फौरी तौरपर कुछ करते दिखने के लिए पिछले हफ्ते से दिल्ली में वायु प्रदूषण से निपटने की एक आपात योजना शुरू की गई है। इस योजना का नाम ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान रखा गया है। ये अलग बात है कि ऐसी कई...

  • आखिर क्यों होने चाहिए भारत के विकास के केंद्र में खेती और किसान

    चार दिन पहले लंदन स्कूल ऑफ़ इकनॉमिक्स में राहुल गाँधी छात्रों से बात कर रहे थे। संवाद में गांव, कृषि और किसान जैसे मुददे भी उठे। एक छात्र ने राहुल गांधी से सवाल किया कि 'भारत के विकास की बातचीत के केंद्र में खेती और किसान ही क्यों है? इंडस्ट्री और दूसरे क्षेत्र क्यों नहीं?' समय की सीमाओं में जवाब...

  • जल प्रबंधन में कुशल केरल क्यों डूबा बाढ़ में, यह त्रासदी सबक है पूरे देश के लिए

    सौ बरसों में सबसे भयावह बारिश के बीच केरल त्राहिमाम कर रहा है। चार दिनों तक इतनी खराब स्थिति रही कि भारत के इस तटीय राज्य की कि संयुक्तराष्ट्र तक को हालात पर संज्ञान लेना पड़ा। क्यों न करता क्योंकि वहां 350 लोग मर गए हैं। लगभग 10 लाख लोग राहत शिविरों में हैं। सारी दुनिया करूणा का भाव दिखा रही है।...

  • मुद्दा : किसान के उत्पाद के दाम को लेकर यह कैसा विरोधाभास

    सरकार के सिर पर अचानक महंगाई की चिंता सवार हो गई है। इसीलिए रिज़र्व बैंक ने दो महीने के भीतर दूसरी बार रेपो रेट में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर दी। मौजूदा सरकार को यह काम अपने शुरू के चार साल के कार्यकाल में एक बार भी नहीं करना पड़ा था। इसीलिए यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर इस बीच देश में ऐसा हो...

  • तो फिर वर्षा का पूर्वानुमान किसान के किस काम का

    देश के कुछ इलाकों में ताबड़तोड़ बारिश हो गई है। सरकारी मौसम विभाग खुश है कि वर्षा का उसका पूर्वानुमान जो गड़बड़ा रहा था वह कुछ ठीक होता जा रहा है। हालांकि मानसून का आधा वक़्त गुजरने के बाद वर्षा के वास्तविक आंकड़ों के मुताबिक एक चौथाई भारत पर सूखे का भीषण संकट अभी भी है। एक चौथाई भारत बाढ़ की चपेट में...

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