स्वास्थ्य सेवाओं को मौलिक अधिकार बनाने की ओर एक कदम और बढ़ा केंद्र

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नई दिल्ली (भाषा)। ‘‘सभी को निश्चित स्वास्थ्य सेवाएं'' मुहैया कराने की वकालत करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के मसौदे पर एक नोट तैयार किया है। केंद्रीय कैबिनेट अगले महीने नोट के जरिए जारी किए गए इस प्रस्ताव पर विचार कर सकती है।

प्रस्तावित राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, जो पिछले दो साल से लंबित है, का मकसद लोगों को अधिकार के रुप में निश्चित स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराना है। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘‘कैबिनेट नोट तैयार किया जा चुका है। यह स्वास्थ्य मंत्री के पास है। इस पर दस्तखत होते ही इसे केंद्रीय कैबिनेट को भेजा जाएगा।'' 

अधिकारी ने बताया कि कैबिनेट नोट में स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार बनाने की बात नहीं है, क्योंकि इसके ‘‘कानूनी नतीजे'' होंगे, लेकिन नोट में निश्चित स्वास्थ्य सेवाओं की बात कही गई है। उन्होंने कहा, ‘‘हमने ‘मौलिक अधिकार' शब्द का इस्तेमाल नहीं किया है। हम निश्चित स्वास्थ्य सेवाओं की पेशकश कर रहे हैं। हम एक अधिकार के रुप में निश्चित सेवाएं मुहैया कराने की दिशा में बढ़ेंगे, न कि मौलिक अधिकार के रुप में। मौलिक अधिकार के कानूनी नतीजे होते हैं।'' 

समझा जाता है कि मंत्रालय ने विभिन्न सरकारी विभागों एवं राज्य सरकारों सहित विभिन्न पक्षों से कई दौर की चर्चा की है। अधिकारी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के मसौदे में पहले कहा गया था कि स्वास्थ्य एक मौलिक अधिकार होगा, लेकिन इस नोट में यह बात नहीं कही गई है। नोट में ‘‘निश्चित सेवाओं'' का प्रस्ताव किया गया है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2015 के मसौदे में प्रस्ताव किया गया था कि केंद्र एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य अधिकार कानून बनाएगा जिससे स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार का दर्जा मिल जाएगा और ऐसे में स्वास्थ्य के अधिकार के हनन पर इसे न्यायालयों में चुनौती दी जा सकेगी।

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