स्वतंत्रता सेनानी के परिवार को रोटी भी नहीं नसीब

स्वतंत्रता सेनानी के परिवार को रोटी भी नहीं नसीबगाँव कनेक्शन

सुलतानपुर। आजाद हिन्द फौज़ के सिपाही स्व. जहीर आलम का परिवार आज भुखमरी के कगार पर पहुंच गया है। परिवार की हालत यह है कि आज इनके पास न तो ठीक से तन ढकने को कपड़ा है और न ही सिर पर छत।

जब तक सेनानी की पत्नी जीवित थी, तबतक परिवार पेंशन से अपना भरण-पोषण करता था पर उनकी भी मृत्यु के बाद परिवार पर तो जैसे पहाड़ टूट पड़ा है।

सुलतानपुर जिला मुख्यालय से 15 किमी थाना गोसाईगंज के हुसैनगंज इनायतपुर गाँव के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व जहीर आलम की बहू रूमाजहां (50 वर्ष) बताती हैं, ''हमारे पास दो बीघा खेत हैं पर उनका कोई पट्टा (रजिस्ट्री) नहीं है, लड़कियों की पढ़ाई, शादी-ब्याह का खर्च कैसे निकलेगा कोई अता-पता नहीं है। हम दूसरे के खेत में मजदूरी करके अपने परिवार का पेट भर रहे हैं।''

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के परिवार को केंद्र व प्रदेश सरकार की आर्थिक मदद की आस है। लेकिन शासन-प्रशासन की तरफ  से उन्हें आज तक आवास भी नसीब नहीं हुआ। ऐसा नहीं है कि परिवार किसी से नहीं मिला।

स्व. जहीर आलम  के परिवार की मदद करने पर रामयज्ञ मिश्र, सीडीओ सुलतानपुर बताते हैं, ''हमे जान कर आश्चर्य हो रहा है कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. जहीर आलम का परिवार एक आच्छादित मकान (तम्बू) में रह रहा है। इनके आवास के मामले को गम्भीरता से क्यों नहीं लिया गया इसमें कहीं न कहीं घोर लापरवाही की गई है।''

परिवार ने सांसद, विधायक से लेकर जिला प्रशासन के चक्कर लगाए लेकिन इतने से भी किसी का दिल नहीं पसीजा। इनके पास पहले एक कच्चा घर भी था वह भी अब गिर गया है। हालत यह है कि परिवार एक तम्बू में अपना गुजारा कर रहा है। 

''हम प्रधान से लेकर सभी से फरियाद कर चुके हैं लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ भी हासिल नहीं हुआ। दो बीघा जमीन के भरोसे दो बच्चे व तीन लड़कियों की पढ़ाई का जिम्मा हैं। देखो यह सब कैसे होगा।'' रूमाजहां आगे बताती हैं।

परिवार की हालत बताते हुए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के पुत्र मोहम्मद शफी (55 वर्ष) कहते हैं, ''हमारे पिता जी को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का तांबे का तमगा तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय इन्दिरा गांधी ने दिया था। अपने पिता के साथ हम सांसद विधायक के पास एक आवास के लिए गए लेकिन आश्वासन के अलावा हमें कुछ भी नहीं मिला। इसी की आस लगाए हमारे पिता जी की सांसे 14 फरवरी 2002 को थम गई।'' 

सेनानी आलम के लड़के शमी आलम व बहू समेत तीन लड़की और दो बच्चों का यह परिवार किसी तरीके गुज़ारा कर रहा है। इस ठंड के मौसम में जहां हर कोई अपने घर के अन्दर रजाई मे दुबक कर सो रहा होता वहीं यह परिवार ठंडी हवाओं से लड़ रहा होता है।

रिपोर्टर - केडी शुक्ला

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