स्वच्छाग्रही बन उठाई खुले में शौच के खिलाफ आवाज

ग्रामीण युवा ने स्वच्छाग्रही बन गाँवों में बनवाए एक हजार से ज्यादा शौचालय

स्वच्छाग्रही बन उठाई खुले में शौच के खिलाफ आवाज

लखनऊ। खुले में शौच के खिलाफ आवाज उठाकर गाँव के इस युवा ने न सिर्फ अपने गाँव को सबसे पहले खुले में शौच मुक्त किया, बल्कि स्वच्छाग्रही बन अब तक कई गाँवों में एक हजार से ज्यादा शौचालयों का निर्माण कर चुके हैं।

दुर्गेश सिंह (29 वर्ष) सीतापुर जिला स्थित कसमण्डा ब्लॉक के गाँव मोहत्तेपुर के रहने वाले हैं। दुर्गेश फोन पर बताते हैं, "एक अच्छे समाज के निर्माण के लिए साफ-सफाई और शिक्षा दो बुनियादी आधार हैं। मैंने भी अपने गाँव में लोगों से खुले में शौच जाने से बीमार होने तक देखा है। ऐसे में मैंने स्वच्छाग्रही बनने की ठानी। स्वच्छाग्रही बन मैंने सबसे पहले अपने गाँव को खुले में शौचमुक्त किया और अबतक 38 गाँवों में लोगों को जागरूक कर एक हजार से ज्यादा शौचालयों का निर्माण करा चुका हूं।"


दुर्गेश बताते हैं, "पहले जब हम लोगों से शौचालय बनवाने की बात करते थे तो उस समय लोग हमारा बहुत मजाक उड़ाते थे। लोगो से प्रोत्साहन ना मिलने पर भी मैं और मेरी टीम इस काम में लगी रही। हम सब लोग सर्दियों में भी सुबह उठकर गाँव में निकल जाते थे औरलोगों को खुले में शौच ना करने के लिये कहते थे।"

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दुर्गेश ने बताया, "शुरू में लोगों ने विरोध किया लेकिन बाद में धीरे-धीरे बहुत से लोग हमारे साथ जुड़ने लगे। इस दौरान हमारे साथ मुस्लिम समुदाय की एक महिला साकिरा, गाँव के वरिष्ठ सदस्य भगौती जी और एक छोटी लड़की शाजिया ने मिलकर गाँव में स्वच्छता की मुहिम की शुरुआत की।" उन्होंने आगे बताया, "इस तरह से इन सब लोगों के साझा प्रयास से गाँव में चौपाल का आयोजन किया गयाऔर उसके माध्यम से लोगों को शौचालय बनवाने के बारे में जानकारी दी जाती थी।"

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कक्षा पांच की छात्रा शाजिया (13 वर्ष) ने गाँव कनेक्शन को बताती हैं, "मैं अपने साथियों के साथ मिलकर लोगों को शौचालय के इस्तेमालके बारे में बताती थी और उन्हें बाहर खुले में शौच करने से भी मना करती थी। हम तीन लोग जब भी समय मिलता था, एक साथ जाकरलोगों से शौचालय बनवाने को कहते थे। इसमें दुर्गेश जी हमारी बहुत मदद करते थे।"

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शौचालय बने तो जुड़ते गए लोग

वहीं, स्वच्छाग्रही दुर्गेश बताते हैं, "एक दिन जब हम गाँव में लोगों को खुले में शौच करने से मना कर रहे थे उस समय एक महिला,जिसका नाम साकिरा है, ने कहा कि मुझे मेरे घर में शौचालय बनवाना है। मेरे पति बाहर रहते हैं और मेरे घर में तीन बेटियां भी हैं। सुबह-शाम घर से बाहर शौच के लिये निकलना हमारे लिये बहुत मुश्किल हो जाता है। इसलिये हम अपने घर में शौचालय बनवाने के लिये तैयार हैं।" दुर्गेश ने बताया, "इस तरह से गाँव में शौचालय बनवाने का काम शुरू हुआ। साकिरा को जब सरकार की तरफ से भी शौचालयके लिये अनुदान मिला तो उसने बाकी लोगों को भी शौचालय बनवाने के लिये प्रेरित किया।"



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