छत के लिए तरस रहे आंगनबाड़ी केंद्र, विभाग खामोश 

छत के लिए तरस रहे आंगनबाड़ी केंद्र, विभाग खामोश खस्ताहाल आंगनबाड़ी केंद्र।

बहराइच से अतुल पांडेय रायबरेली से मोबिन अहमद, कम्यूनिटी जर्नलिस्ट

रायबरेली/बहराइच। कुपोषण दूर करने के लिए सरकार आंगनवाड़ी योजना चला रही है, जिसमें छह वर्ष तक के बच्चों के भोजन,शिक्षा और पोषण जैसी चीज़ों का खयाल रखा जाता है। लेकिन जमीन पर ये योजना पूरी तरह कारगर नहीं हो रही है। कहीं आंगनबाड़ी केंद्र नहीं हैं और कहीं केंद्र है तो उसपर छत नहीं है।

रायबरेली जिला मुख्यालय से लगभग 50 किमी दूर पूर्वोत्तर दिशा में हरचंदपुर ब्लॉक के गुल्लूपुर गाँव में आंगनवाड़ी केंद्र के लिए कोई ब्लिडिंग नहीं है जबकि गाँव के लगभग 32 बच्चे केंद्र पर पंजीकृत हैं। इस बारे में आंगनवाड़ी कार्यकत्री राजदेवी बताती हैं, “गाँव में आंगनबाड़ी केंद्र बनवाने के लिए हमने कई बार ब्लॉक में पत्र लिखकर दिया ,लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। पोषाहार के नाम पर हमें सिर्फ पंजीरी ही मिलती है,जबकि योजना में कई गाँवों में पका-पकाया भोजन भेजा जाता है।”

गाँव में आंगनबाड़ी केंद्र बनवाने के लिए हमने कई बार ब्लॉक में पत्र लिखकर दिया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। पोषाहार के नाम पर हमें सिर्फ पंजीरी ही मिलती है।
राजदेवी, कार्यकत्री,रायबरेली

महिला एवं बाल विकास विभाग के मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक बाल विकास परियोजना के तहत प्रदेश में कुल 821 विकास खण्डों के अंतर्गत आने वाले गाँवों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। इसके तहत सरकार एक लाख 53 हज़ार आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों को बांटे जाने वाले पोषाहार पर प्रतिवर्ष 7000 करोड़ रुपए खर्च कर रही है पर धरातल पर यह योजना कारगर नहीं हो पा रही है।

वहीं दूसरा मामला बहराइच जिले का है। जिला मुख्यालय से लगभग 40 किमी पश्चिम दिशा में चितौरा पंचायत का आंगनवाड़ी केंद्र जर्जर हालत में है। केंद्र की कार्यकत्री रूपमाला देवी 35 बताती हैं,'' केंद्र का भवन आंधी तूफान में पिछले वर्ष गिर गया था, तब से आज तक नहीं बन पाया है।केंद्र ना होने से यहां पर बच्चे भी नहीं आते हैं। जब तक केंद्र नहीं बन जाता है स्कूल के बरामदे में ही आंगनबाड़ी चलती है।''

गाँवों में गर्भवती महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण पर काम कर रही संस्था समेकित बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) के मुताबिक उत्तरप्रदेश में वर्तमान समय में कुल 16 हज़ार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्र हैं। इसके अलावा कम अबादी बाले क्षेत्रों के लिए 23,223 लघु आंगनवाड़ी केंद्र हैं। इसके बावजूद योजना यह हाल निराशाजनक है।


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