छुट्टा जानवरों की आरामगाह बना बहराइच का जिला अस्पताल

छुट्टा जानवरों की आरामगाह बना बहराइच का जिला अस्पतालबहराइच के जिला अस्पताल में मरीजों को सता रहा आवारा जानवरों का डर

प्रशान्त श्रीवास्तव- कम्युनिटी जर्नलिस्ट

बहराइच। जिला अस्पताल इन दिनों इलाज कराने आए लोगों को पहले अस्पताल परिसर में घूम रहे छुट्टा जानवरों से निपटना पड़ता है, फिर जाकर डाक्टरों से मुलाक़ात होती है। ऐसे में लोग यहां आने से पहले सौ बार सोंचते है की इलाज की जगह कोई हादसा न हो जाए।

बहराइच के रिसिया इलाके से अपने पिता का इलाज करने आए राम कुमार (32) ने बताया कि मैं यहां दो बार आया हूं। अस्पताल परिसर में अक्सर सांड और आवारा कुत्ते घूमते रहते हैं, जो कभी भी किसी पर हमला कर सकते हैं।अस्पताल वालो को इससे कोई मतलब नहीं रहता है। सब अपने कामों में लगे होते हैं।''

जिला अस्पताल के बरामदों और वार्डों में अक्सर छुट्टा जानवर आपको घूमते हुए नज़र आएंगे,जिससे इलाज कराने आए मरीजों और उनके तीमारदारों को अक्सर डर लगा रहता है । इसके अलावा अक्सर अस्पताल आए मरीज़ों की संख्या अधिक हो जाने पर उन्हें ज़मीन पर ही लिटा दिया जाता है। ऐसे में महिला और बच्चों के वार्डों में जानवरों का इस तरह घूमना किसी भी हादसे को अंजाम दे सकता है।

मेरी पत्नी गर्भवती है, जिसको दिखाने मैं आया हूं, वार्डों में रात में भी कुत्ते बैठे रहते हैं, जो किसी को भी काट सकते हैं।
सुरेश, (29 वर्ष)- रामगाँव

स्थानीय लोगों के मुताबिक अस्पताल में भ्रष्टाचार की खबरों को छापने से सीएमएस साहब ने पत्रकारों को अस्पताल में खबरों के लिए जानकारी देने से तो अपने कर्मचारियों पर प्रतिबन्ध लगा दिया है लेकिन उन्होंने खुले आम घूम रहे इन जानवरों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया, जो की दुर्घटना के साथ-साथ संक्रामक बीमारियों का कारण भी बन रहे हैं।

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