नहर टूटने से सैकड़ों बीघा खेत डूबे, तिल और अरहर को नुकसान

नहर टूटने से सैकड़ों बीघा खेत डूबे, तिल और अरहर को नुकसानप्रतापगढ़ ज़िले की पट्टी तहसील के भरोखन गाँव में नहर टूटने से सैकड़ों बीघे फसल डूब गई।

मो. सलीम, कम्यूनिटी जर्नलिस्ट
पट्टी (प्रतापगढ़)। नहर के भरोसे खेती करने वाले किसानों के लिए नहर ही मुसीबत बन गयी है। नहर टूटने से सैकड़ों बीघा खेत डूब गए हैं। कई फोन करने के बाद अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे तो ग्रामीणों ने खुद किसी तरह पानी रोका। ग्रामीणों के मुताबिक पिछले पांच साल में कई बार ये नहर टूट चुकी हैं लेकिन नहर विभाग के अधिकारियों की नींद नहीं टूट रही है।

पट्टी तहसील के भरोखन गाँव से शारदा सहायक खंड 34 नहर होकर गुजरती है। नहर के भरोसे ही यहां के हजारों लोग खेती करते हैं। लेकिन कई बार यही नगर उनकी फसल चौपट भी कर देती है। सोमवार को भरोखन गांव के पास अचानक नहर टूटने से सैकड़ों बीघा खेत डूब गयी है। नहर के पास के किसानों का सबसे अधिक नुकसान हुआ है।

भरोखन गाँव के किसान रघुनाथ सिंह (50 वर्ष) अपने खेत की बर्बादी का हाल बताते हुए कहते हैं,'' हमने पांच बीघा में धान लगाया है। पूरे खेत में घुटने तक पानी भर गया है। अगर हफ्ते भर खेतों में पानी भरा रहा तो फसल सड़ जाएगी।''

तिल, अरहर जैसी दहलनी और तिलहनी फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान
नहर टूटने से धान की फसल कम नुकसान होगा, लेकिन तिल, ज्वार, बाजरा और अरहर की फसल को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। सबसे ज्यादा नुकसान कुंदनगंज, भरोखन रेडीगारापुर और उसके आस-पास के दर्जन से अधिक गाँवों के किसानों को हुआ है। कुंदनगंज के रुस्तम यादव (25 वर्ष) बताते हैं, "क्षेत्र में कई एकड़ खेतों में पानी भर चुका है पर इसका हाल जानने के लिए आज तक प्रशासन की तरफ से कोई भी अधिकारी यहां पर नहीं आया है। अगर जल्द ड्रेन को खाली नहीं कराया गया, तो धान बर्बाद हो जाएगा।
ठेकेदार रामसिंह की सक्रियता और ग्रामीणों के प्रयास से नहर तो बांध दी गयी, लेकिन फिर भी बहुत नुकसान हो गया। पट्टी क्षेत्र में अरहर की खेती सबसे अधिक अरहर की फसल होती है। साथ ही इस क्षेत्र से तिल, धान और ज्वार बाजारा की पैदावार होती ही है।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

Share it
Top