धार्मिक सौहार्द की मिसाल है यह रामलीला, मुस्लिम डायरेक्टर को याद है रामायण की हर चौपाई

धार्मिक सौहार्द की मिसाल है यह रामलीला, मुस्लिम डायरेक्टर को याद है रामायण की हर चौपाईरामलीला का मंचन करते कलाकार

लोकेश मंडल शुक्ल- कम्यूनिटी जर्नलिस्ट

रायबरेली। त्यौहार सिर्फ खुशियां मनाने के मौके नहीं देते बल्कि आपसी भाईचारा भी बढ़ाते हैं। रायबरेली जिले की दशकों पुरानी एक रामलीला में हिंदु-मुस्लिम मिलकर रामलीला का मंचन करते हैं।

जिले में सम्मानित स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व समाज सेवी मुन्शी चन्द्रिका प्रशाद के ज़माने में बछरावां क्षेत्र में दशहरे की रामलीला की शुरुआत की गई थी। तब से आज 30 वर्ष तक एक रावण का सीमेंटेड पुतला डिग्री कॉलेज की बाउंड्री पर बना हुआ था और रामलीला का मंचन वहीं होता था। लेकिन अब इस परंपरा को हिंदू-मुस्लिम समुदाय ने साथ मिलकर आगे बढ़ाते हुए क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है।

रामलीला

रामलीला की शुरूआत शरद पूर्णिमा के दिन होती है, जिसका सुभारम्भ माधव आश्रम में स्थापित शिव मंदिर में पूजा अर्चना व हवन द्वारा आज भी होता है। इस दशहरे की खास बात यह है कि इसे आपसी भाईचारे की प्रतीक हिन्दू-मुस्लिम रामलीला कमेटी आयोजित करती है।
भूमंडल शुक्ला, अध्यक्ष- रामलीला कमेटी

आयोजन समिति का नाम रखा न्यू हिन्दू-मुस्लिम रामलीला अभिनय कमेटी

रामलीला कमेटी में ज़्यादातर हिन्दू मुस्लिम और पंजाबी कलाकार हैं। इसीलिए इस समिति का नाम न्यू हिन्दू-मुस्लिम रामलीला अभिनय कमेटी है। और तो और इस कमेटी के डायरेक्टर मो. अलीम को हिंदू घर्म ग्रन्थ में लिखी ऐसी कोई भी चौपाई नहीं है, जो उन्हें न याद हो।

रामलीला कलाकार

इस कमेटी के कई कलाकार रास्ट्रीय स्तर पर अभिनय कर चुके हैं। इसी कमेटी के कलाकार राजेन्द्र विस्वास फिल्मों में एक्टिंग करते हैं। इसके अलावा रामलीला कमेटी को कई बार स्थानीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। कई बार नगर पंचायत द्वारा ट्रॉफी भी दी जा चुकी है।
मो. अलीम, रामलीला कमेटी के डायरेक्टर

इस रामलीला मंचन दल की खास बात यह है कि इस कमेटी में रावण का रोल करने वाले दुर्गेश शुक्ल का अभिनय यहां के स्थानीय लोगों को इतना पसंद है कि आज भी कई गाँवों की गलियों से लेकर नगर के चौराहों तक बच्चा-बच्चा उन्हें रावण के नाम से जनता है।

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