नीम कोटेड यूरिया के इस्तेमाल से कम खर्चे में होगी ज्यादा उपज

नीम कोटेड यूरिया के इस्तेमाल से कम खर्चे में होगी ज्यादा उपजनीम लेपित यूरिया का इस्तेमाल करता किसान

मोबिन अहमद- कम्युनिटी जर्नलिस्ट

रायबरेली। किसान खेती में अच्छी उपज पाने के तरह तरह के रसायनिक उर्वरकों का प्रयोग अधिक मात्रा में करते हैं। खेती में रसायनिक खादों का इस्तेमाल ना केवल फसलों के लिए हानिकारक है, बल्कि इनका प्रयोग भूमि की उपजाऊ क्षमता को घटाता है। ऐसे में किसान अगर रसायनिक खादों की जगह नीम लेपित यूरिया का प्रयोग करे, तो खेती में उपयोग किए जाने वाले उर्वरकों की लागत कम की जा सकती है।

किसानों के लिए नीम लेपित यूरिया के प्रयोग को लाभदायक मानते हुए खुशहाली कृषि केन्द्र (रायबरेली) क्षेत्रीय प्रबंधक व कृषि सलाहकार अनूप मिश्रा बताते हैं, ''खेती में अच्छे परिणाम पाने के लिए किसान युक्ति संगत तकनीकि विधि एवं नीम लेपित यूरिया का प्रयोग करें, तो इससे उत्पादन व फसल में क्षति को कम किया जा सकता है।''

नीम कोटेड यूरिया

आजकल किसान यूरिया पर सब्सिडी मिलने के कारण अन्य उर्वरकों की तुलना यूरिया का अन्धाधुंध प्रयोग करते हैं। यूरिया के अत्याधिक प्रयोग से फसल जल्द बढ़ जाती है, जिसके कारण फसल जल्दी गिरकर नष्ट हो जाती है। दलहनी फसलों पर भी इसका असर होता है, जिससे फसलों में कलियां कम लगती हैं। नीम लेपित यूरिया के उपयोग से किसान हानिकारक कीटों से फसल को बचा सकते हैं।

फसल में नीम लेपित यूरिया सामान्य यूरिया की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत कम लगती है। नीम लेपित यूरिया की मदद से नाइट्रोजन के धीरे-धीरे निकलने के कारण भूमि की उपजाऊ की क्षमता में वृद्धि होती है, जिससे 10 से 15 प्रतिशत तक उपज में वृद्धि मिलती है।
अनूप मिश्रा, कृषि सलाहकार

कैसे बनाई जाती है नीम लेपित यूरिया

नीम लेपित यूरिया को बनाने के लिए यूरिया के ऊपर नीम के तेल का लेप कर दिया जाता है। यूरिया के ऊपर नीम का तेल नाइट्रीफिकेशन अवरोधी के रूप में काम करता है। नीम लेपित यूरिया पौधे तक संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन पहुंचाती है। इससे फसल अपने समय अनुसार बढ़ते हैं और फसलों में कीट प्रकोप भी कम हो जाता है।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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