निजी स्कूलों को मात देता प्राथमिक स्कूल

निजी स्कूलों को मात देता प्राथमिक स्कूलमहरौनी ब्लॉक के छपरट का प्राथमिक विघालय 

सुखवेन्द्र सिंह परिहार, कम्यूनिटी रिपोर्टर

ललितपुर। परिषदीय विघालयों की शिक्षा प्रणाली पर केन्द्र व राज्य सरकार मिलकर अरबों रुपया खर्च करती है। इसको लेकर हमेशा शिक्षा की गुणवत्ता पर सवालिया निशान लगते हैं। इन सब को दरकिनार कर कुछ प्राथमिक स्कूल निजी स्कूलों को मात दे रहे हैं।

ललितपुर जनपद से 34 किमी पूर्व दिशा में महरौनी ब्लॉक के प्राथमिक विघालय छपरट के स्कूल का शैक्षिक गुणवत्ता में निजी स्कूल को मात दे रहा है। यहां के बच्चे साफ-सुथरी यूनीफार्म में आते हैं। स्कूल में 188 छात्र हैं। एक प्रधानाध्यापक व तीन सहायक अध्यापिकाएं हैं। इन्होंने स्कूल के शैक्षिक गुणवत्ता के लिए काफी महनत की। यहां के बच्चों को 50 तक पहाड़े आते हैं और बच्चों को अंग्रेजी का ज्ञान है।

प्राथमिक विघालय छपरट में राम मनोहर राव मण्लायुक्त झांसी व रूपेश कुमार जिलाधिकारी ललितपुर अचानक मौके पर मतदान केन्द्र का निरीक्षण करने पहुंच गये जहां पर प्रधानाध्यापक ने प्रगति आख्या पेश की। उसी समय मण्डलायुक्त ने सात बच्चों से बातचीत कर शैक्षिक गुणवत्ता परखी। इसके चलते मण्डलायुक्त ने बच्चों से लगभग 60 प्रश्न एवं जिलाधिकारी ने 20 सवाल पूछे। बच्चों ने लगभग 75 सवालों के सही जवाब दिए।

मण्डलायुक्त जब अध्यापक बने और बच्चों से पूछने पर कक्षा एक के छात्र राजू (सात वर्ष) ने 25 तक पहाड़े सुनाए। इसी क्रम में कक्षा तीन के छात्र जितेन्द्र (9 वर्ष) ने 47 का पहाड़ा सुनाया। इसकी के साथ साथ कक्षा चार की रचना ने 50 तक व कक्षा 5 की सौरभ, अनिल, राहुल, नीलम, संजीव ने 50 तक के पहाड़े सुनाये। इसी क्रम मे बच्चों ने अंग्रेजी के प्रश्नों के उत्तर दिये।

शिक्षा की उच्च गुणवत्ता देखकर मण्डलायुक्त व जिलाधिकारी द्वारा सभी बच्चों को ईनाम के रूप मे चाकलेट बांटी। ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में काम कर रहे प्रधानाध्यापक के कार्य को साराहा। राम मोहनराव मण्डलायुक्त झांसी ने अनुश्रवण पंजिका पर लिखा, “अफताब अहमद द्धारा मेहनत करके बहुत अच्छा पढ़ाई करा रहे, पहली बार मैने सुना बच्चो को 50 तक का पहाड़ा आता है। प्रधानाध्यापक द्धारा बहुत अच्छा प्रयास किया गया। मैं उनके कार्य की सराहना करता हूं।

रूपेश कुमार जिलाधिकारी ललितपुर ने स्कूल के शिक्षकों को संदेश देते हुए कहा, “यदि इसी प्रकार शिक्षक अपने दायित्व का सही तरीके से निर्वहन करते हैं और बच्चों को लगन के साथ पढ़ाते हैं तो गुरू का सम्मान इसी तरह पाएंगे। ड्रीम प्रोजेक्ट पर काम कर रहे अफताब अहमद प्रधानाध्यापक प्राथमिक विघालय छपरट ने बताया कि “शिक्षक को अपने कर्तव्य का सदैव पालन करना चाहिए। इससे सारी समस्याएं खुद समाप्त हो जाती हैं। वे आगे बताते हैं कि प्रत्येक बच्चों की अलग अलग डायरी है। उसी के हिसाब से पढ़ाया जाता है।”

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