बाराबंकी के ताजिए की कई जिले में होती है मांग

बाराबंकी के ताजिए की कई जिले में होती है मांगबाराबंकी के ताजिए की कई जिले में होती है मांग

बेलहरा (बाराबंकी)। इमाम हुसैन की याद में मनाये जाने वाले त्यौहार मुहर्रम के लिए ताजिया कारीगर ताजिया की बनावट सजावट में लगे हुए हैं। ये सिर्फ पैसे ही नहीं बल्कि शोहरत भी बटोरते हैं क्यूंकि यहां के ताजिया कई जिलों में जाने जाते हैं और दूर-दूर से ताजियादार यहां आकर खरीददारी करते हैं। ये सिर्फ पैसे ही नहीं बल्कि शोहरत भी बटोरते हैं क्योंकि यहां के ताजिया कई जिलों में जाने जाते हैं और दूर-दूर से ताजियादार यहां आकर खरीददारी करते हैं।

जिला मुख्यालय से 38 किमी की दूरी पर स्थित कस्बा बेलहरा जो बनावटी ताजिया की परम्परा को लेकर सिर्फ आस-पास ही नहीं बल्कि कई जिलों में अपनी एक पहचान बना चुका है। दूर-दूर तक लोग इस कस्बे को ताजिया के रूप में जानते हैं। यहां की सदियों पुरानी परम्परा को आज भी यहां के कुशल कारीगर जीवित रखे हुए हैं।

ताजिया बनाने के काम मे लगे मोहम्द तैय्यफ (50 वर्ष) बताते हैं, "हम लोग हिन्दू-मुस्लिम ताजिया दोनों बनाते हैं, इसलिए यहां के ताजियों की बहुत मांग है। हम पूरे साल ताजियों का आर्डर लेते हैँ और आर्डर पर ही ताजिया बनाते हैं। ताजिया बनाने के लिए काफी जगह की आवश्कता होती है। हम लोगों के पास पर्याप्त जगह ना होने के कारण हम आर्डर पूरा नहीं कर पाते हैं।" कयूम खान (58 वर्ष) बताते हैं, "इस कस्बे में ताजिया बनाने वाले कारीगर पूरे वर्ष बस्वाडी की खरीददारी करते हैं और घर की महिलाएं तक ठाठ बांधने में लगे रहते हैं। फिर मुहर्रम का चांद देखते ही ताजियों की सजावट में लग जाते हैं। ये ताजिये अपनी खूबसूरती की ओर लोगों के दिलों को मोह लेते हैं।" बताते चले की यहां के ताजिया बनाने वालों के लिए ये सिर्फ शुभ काम ही नहीं बाल्कि ये कुछ लोगों की असल कमाई है। इसी पर इनकी रोजी रोटी का सारा दारोमदार है। साल भर की कमाई ये सिर्फ इन्हीं चन्द दिनों में कर लेते हैं साथ ही अपना और कस्बे का नाम भी ऊँचा करते हैं।

30 फुट तक की ऊंचाई के बनते हैं ताजिए

बाराबंकी जिले का बेलहरा क़स्बा जहां की खूबसूरती बनावटी ताजियों ने ना सिर्फ क्षेत्र बल्कि कई जिलों तक अपनी छाप छोड़ रखी है। 10 से 30 फुट की ऊंचाई के ताजिया यहां बनती है।

इन जिलों में ताजियों की होती है भारी मांग

सीतापुर, लखीमपूर, फैजाबाद, हरदोई, लखनऊ, बिसवां, कानपुर आदि शहरों में यहां से खरीदकर ले जाते हैं ताजिए।

"This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org)."

बीरेंद्र सिंह (कम्युनिटी जर्नलिस्ट)

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