130 किसान उत्पादक संगठनों से किसानों की खेती को मिली मजबूती

Neetu SinghNeetu Singh   8 Nov 2016 9:09 PM GMT

130 किसान उत्पादक संगठनों से किसानों की खेती को मिली मजबूतीप्रशिक्षण कार्यक्रम में किसानों को जानकारी देते हुए।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

हुसैनाबाद (फतेहपुर)। एमसीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद माइक्रोसॉफ्ट कम्पनी में आठ साल जॉब की। इस जॉब से मेरे मन को सुकून नहीं मिला, मुझे लगा कि मैं अपने गाँव के किसानों के साथ मिलकर काम करूँ। वर्ष 2010 में नौकरी छोड़ने के बाद मैंने किसानों के साथ मिलकर पांच फार्मर क्लब बनाये और 2014 में एक हजार किसानों के साथ मिलकर किसान उत्पादक संगठन का निर्माण किया।

किसानों को फायदा तब जब हो तकनीक की जानकारी

किसान उत्पादक संगठन का उद्देश्य किसानों को हर फसल की बोआई से पहले पूरी तरह से प्रशिक्षण दिया जाए कि कम लागत में कैसे बेहतर पैदावार करें, जिससे किसान लाभान्वित हो सकें। ग्रामीणों का विकास तभी संभव है जब उन्हें कृषि की तकनीक की जानकारी हो और वो अपनी फसल से बेहतर पैदावार ले पायें।

अब संगठन से जुड़े 1000 किसान

फतेहपुर जिला मुख्यालय से 60 किलोमीटर दूर पश्चिम दिशा में हुसैनाबाद गाँव है। इस गाँव में रहने वाले भुवन दिवेदी (30 वर्ष) का कहना है कि लखनऊ में पढ़ाई और जॉब करने के बाद भी मेरा गाँव में हमेशा आना जाना रहता था। मुझे हमेशा लगता था कि गाँव में काम करने की बहुत संभावनाएं हैं, इसलिए मै अपनी जॉब को छोड़कर 2009 में गाँव वापस आ गया। वो आगे बताते हैं कि उसी समय मैंने किसानों के साथ मिलकर फार्मर क्लब बनाना शुरू किया। वर्ष 2010 में पांच फार्मर क्लब बने। शुरुवात 50 किसानों के साथ हुई थी और अभी इस किसान उत्पादक संगठन में 1000 किसान जुड़े हैं।

तब किसानों को दिया जाता है प्रशिक्षण

भुवन का कहना है कि किसान मेहनत तो बहुत करते हैं पर सही जानकारी न मिल पाने की वजह से बेहतर परिणाम नहीं ले पाते हैं। अगर उन्हें प्रशिक्षण दिया जाए तो उनके द्वारा की गयी मेहनत सफल हो पायेगी। वो आगे बताते हैं कि हमारे यहाँ हर सप्ताह हर क्लब से दो तीन किसानों को बुलाकर कुल 50-75 किसानों को प्रशिक्षण दिया जाता है कि वो जीरो बजट में फसल कैसे लें। ये किसान अपने समूह के बाकी के साथियों को जानकारी देते हैं। इस प्रशिक्षण में खेत की जुताई, बीज शोधन, जैविक खाद, रसायन कीटनाशक के बिना घर पर जैव कीटनाशी बनाना, मेड़बंदी जैसी तमाम तरह की जानकारी इन किसानों को दी जाती है। इन्हें ये भी बताया जाता है कि अगर आप संगठित हैं तो एक साथ मिलकर बीज और खाद खरीद सकते हैं जो आपको किफायती दरों में पड़ेगी।

अब आसानी से मिल जाते हैं खाद और बीज

इस संगठन से हुसैनाबाद की जुड़ी महिला किसान आशा देवी (38 वर्ष) का कहना है कि जबसे हमारे गाँव में किसानों का ये संगठन बना है, तबसे हमें फसल बोने से पहले पूरी जानकारी मिल जाती है। अगर फसल में किसी भी तरह की कोई समस्या है तो कृषि विशेषज्ञ से जानकारी मिल जाती है। वो आगे बताती हैं कि पहले खाद और बीज लेने के लिए बाजार के कई चक्कर काटने पड़ते थे और महंगे दामों पर खरीदने पड़ते थे, अब वही खाद और बीज हमारे गाँव के किसानों को घर बैठे आसानी से मिल रहा है।

ताकि किसानों को मिले बेहतर पैदावार

इस संगठन के सीइओ और फाउंडर भुवन अपने काम से बहुत खुश हैं। गाँव में रहकर ही वो खेती भी कर रहे हैं और बेहतर पैदावार ले रहे हैं। भुवन का कहना है कि ये संगठन और आगे जाए, किसानों को खेती घाटे का नहीं, बल्कि फायदे का सौदा लगे, ये हमारा उद्देश्य है। हमारी कोशिश रहती है कि किसानों की जो भी परेशानी हो उसका हम निस्तारण कर सकें।

तब किसान की दूर हो जाएगी मुश्किल

नाबार्ड के सहायक महाप्रबंधक नवीन कुमार राय बताते हैं, "अब तक 130 उत्पादक संगठन बन गये हैं। किसानों के द्वारा बनाये गये इन संगठनों के मुख्य तीन उद्देश्य हैं, पहला किसानों को संगठित करना, दूसरा उनमें क्षमता विकास और तीसरा बिचौलियों से छुटकारा”। इन संगठनों को बनाने में 12-15 महीने का समय लगा, जिसमें 25000 हजार किसान हमारे साथ जुड़े हैं। ये किसान 50 हजार एकड़ खेती कम लागत में गुणवत्ता पूर्वक कर रहे हैं और किसानों को बेहतर पैदावार मिल रही है। किसानों के लिए बनाये गये ये संगठन पूरी तरह से किसानों के लिए ही काम कर रहे हैं। वो आगे बताते हैं, "उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम से भी बातचीत हुई है, अब वो किसानों का बीज सीधे खरीदेंगे। जिला अधिकारी ने इफको से डीलरशिप करा दी है, इन किसानों को अच्छी कीमत मिले, इसलिए हम लोग फ्यूचर ग्रुप (बिग बाजार), स्पेंसर जैसे मल्टीस्टोर में बात कर रहे हैं। डील फाइनल होते ही दूरदराज़ का किसान अपनी सब्जी, फल और दूसरे उत्पाद बिग बाजार को बेच सकेगा।”

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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