15 वर्षों से विकास की राह तकता पण्डितपुरवा गाँव

15 वर्षों से विकास की राह तकता पण्डितपुरवा गाँवप्रतीकात्मक फोटो (साभार: गूगल)

दीपांशु मिश्रा

पण्डितपुरवा (बाराबंकी)। लखनऊ मुख्यालय से लगभग 40 किमी की दूरी पर स्थित बाराबंकी जिले के निंदूरा ब्लॉक में लगभग 300 की आबादी वाले पण्डितपुरवा गाँव की दशा अत्यंत दयनीय है। यहां पर पीने के लिए पानी की काफी किल्लत है। इतना ही नहीं, सड़कों का अभाव है और नालियां बजबजा रही हैं। बरसात में हालत और बदहाल हो जाती है। सरकारी हैंडपंप प्यासे लोगों को मुंह चिढ़ाते नज़र आते हैं। वे आए दिन खराब पड़े नजर आते हैं। पूरे गाँव में चार हैंडपंप हैं, सभी बदहाली के शिकार हैं। लोगों का कहना है कि इन नलों की ऐसी हालत आज से नहीं, बल्कि पिछले 15 वर्षों से है। वहीं, ग्राम प्रधान को भी गाँव की फ़िक्र नहीं है।

ग्रामीणों ने खोला समस्या का पिटारा

गाँव के बुजुर्ग सलिख (70) बताते हैं, “इस गाँव की आबादी के अनुसार नल कम हैं और जितने भी हैं, वे सब खराब पड़े हैं। पानी की समस्या से निपटने के लिए हमने निजी नल लगवाए, अब वे भी पानी नहीं देते हैं। गाँव में जितने भी कुएं हैं, सभी सूखे हैं।” वहीं, ग्राम निवासी रामलखन (40) बताते हैं, “हम अपनी गाँव की सभी समस्याओं का जिम्मेदार प्रधान को ही ठहराते हैं क्योंकि वे हमारी कोई बात नहीं सुनते हैं। मेरी मां 75 वर्ष की हैं। मेरे पिता की मौत करीब बीस साल पहले हो गई थी। मगर आज तक न ही उन्हें वृद्धा पेंशन मिली है, न ही विधवा पेंशन। इस समस्या पर हमने कई बार प्रधान से बात की, लेकिन कुछ भी हासिल नहीं हुआ।”

15 सालों से गाँव में नहीं हुआ कोई विकास कार्य

ग्राम निवासी एवम पूर्व उपप्रधान गंगाराम (70) बताते हैं, “गाँव की ऐसी हालत पिछले 15 वर्षों से है। कोई भी विकास कार्य नहीं हुआ है। गाँव में कोई भी शौचालय नहीं है। इन सभी समस्याओं पर ग्राम प्रधान से बातचीत करने पर वे बताते हैं, सरकार द्वारा हमें राशि कम मिलती है।” वहीं, प्रधान बताते हैं, “हमें 83 नलों के लिए 22 हजार रुपए की राशि दी गयी है। हम कैसे कार्य करवाएं। हमने ग्रामीणों के साथ मिलकर ब्लॉक, तहसील एवं अन्य कई जगहों पर अर्ज़ी दी लेकिन कोई हमारी नहीं सुनता है।

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