महीनों से खड़े खंभों में नहीं दौड़ सका करंट

महीनों से खड़े खंभों में नहीं दौड़ सका करंटमहीनों से खड़े खंभों में नहीं दौड़ सका करंट

अरुण मिश्रा (कम्यूनिटी रिपोर्टर)

विशुनपुर (बाराबंकी)। दशकों से घरों में बल्ब जलने की राह देखते ग्रामीण अब कई महीनों से गाँव में खड़े बिजली के खम्भों को निहार रहे हैं। अर्सा पूर्व गाड़े गए खम्भों में आज तक करन्ट नहीं दौड़ सका है। जिससे ग्रामीणों में मायूसी है।

क्षेत्र के कुतलूपुर के मजरा सरैयां मकबूलनगर, अंइबाहार और विशुनपुर कस्बे में कई माह पूर्व बिजलीकरण के लिए खम्भे गाड़े गए थे। दशकों से घरों में बिजली जलने की उम्मीद लगाये ग्रामीणों को आशा थी कि जल्द ही उन्हें चिरागों की रोशनी से निजात मिल जायेगी, लेकिन ग्रामीणों की यह उम्मीद फ़िलहाल मूर्तरूप नहीं ले सकी है। वहीँ देवा ब्लाक के सायपुर मजरे सिसवारा में भी करीब सात माह से ग्रामीणों को खंभों में करन्ट दौड़ने का इन्तजार है।

इस सम्बन्ध में सरैयां मकबूलपुर निवासी बुद्धिराम बाजपेई ने बताया, "गाँव में बिजलीकरण होने पर लोगों में काफी ख़ुशी थी, लेकिन आपूर्ति शुरू न होने से फिलहाल निराशा ही हाथ लग रही है।" सायपुर निवासी शिवप्रकाश यादव बाताते हैं, "फ़रवरी में बिजलीकरण होने के बाद ठेकेदार ने होली तक आपूर्ति शुरू हो जाने की बात कही थी, लेकिन ग्रामीण आज तक चिरागों की रोशनी में ही जीवनयापन को विवश हैं।" उन्होंने आगे बताया, "कई पोल टूट चुके हैं और ग्राउंडिंग न किये जाने से कई गिरने के कगार पर हैं।" विभागीय अधिकारियों से कई बार फरियाद के बाद भी आजतक ग्रामीणों को मायूसी ही हाथ लगी है।ग्रामीणों ने गांव की आपूर्ति शीघ्र शुरू कराये जाने की मांग की है।

"This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org)."

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