60 वर्ष का किसान बना मैराथन महारथी, जीते 35 पदक  

60 वर्ष का किसान बना मैराथन महारथी, जीते 35 पदक  किसान सभाजीत यादव अपने मेडल्स के साथ 

बीसी यादव/स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

मछलीशहर (जौनपुर)। हौसला बुलंद हो और मन में कुछ करने और पाने की जिद हो तो कहते हैं कि हवा भी अपना रुख बदलकर आपके साथ हो जाती है। कुछ ऐसा ही करने की जिद रखने वाले जौनपुर के मछलीशहर के किसान सभाजीत यादव हैं। ये उनका हौसला ही तो है कि 60 वर्ष की उम्र में जब लोग जीवन से थक हारकर आराम करते होते हैं तब सभाजीत ने 35 पदक अपने नाम कर लिए हैं। इतना ही नहीं वह अपने बच्चों को भी खेल के लिए तैयार कर रहे हैं और इसके साथ-साथ खेती-किसानी भी करते हैं।

मछलीशहर तहसील के अदारी डभिया गाँव के किसान सभाजीत यादव के साथ भी वही समस्या थी, जो ज्यादातर ग्रामीणों के साथ है- गरीबी। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने कारण वह ज्यादा पढ़ाई नहीं कर सके। सिर्फ पांचवी तक ही पढ़ाई की और फिर पिता के साथ खेती - बाड़ी में लग गए। उनका हमेशा से ही दौड़ में हिस्सा लेना का मन करता था। इसलिए वह हमेशा दौड़ में भाग लेने के लिए खुद प्रैक्टिस करते रहते थे। परिवार की जिम्मेदारियां होने के चलते उनका यह सपना पूरा होने में तमाम अड़चने आईं, लेकिन सभाजीत ने जो बात बहुत पहले ठानी थी।

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उसे पूरा करने के लिए वह शिद्दत के साथ लगे रहे। उन्हें यह सफलता थोड़ी देर से मिली लेकिन उन्होंने अपने नाम इतने गोल्ड मेडल कर लिए हैं कि इस उम्र वाले किसी दूसरे व्यक्ति के लिए सोचना भी मुश्किल है। सभाजीत यादव ने बताया कि उन्होंने 2011 मे एयरटेल हाफ मैराथन दिल्ली वर्ष 2012 में स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद उन्होंने कभी फुल मैराथन मुम्बई, एयरटेल हाफ मैराथन दिल्ली 2013, फुल मैराथन मुम्बई एयरटेल पीछे मुड़कर नहीं देखा।

उन्होंने हाफ मैराथन दिल्ली 2014 में फुल मैराथन दिल्ली, फुल मैराथन बेंगलुरु, मुम्बई हाफ मैराथन, एयरटेल हाफ मैराथन 2015, फुल मैराथन मुम्बई फुल मैराथन बेगलुरु में गोल्ड पर कब्जा जमाया। इस तरह उन्होंने वर्ष 2016 से 2017 तक कुल 35 मेडल जीते।

हर दिन करते हैं अभ्यास

किसान सभाजीत यादव ने बताया कि वह हर दिन करीब 10 किलोमीटर की दौड़ लगाते हैं। सुबह उठ जाते हैं और अभ्यास के लिए निकल जाते हैं। उनका कहना है कि ऐसा करने से उन्हें फिट रहने में भी मदद मिलती है और फिर वह मैराथन में हिस्सा लेने के लिए तैयार रहते हैं। दौड़ लगाने के बाद वह अपने परंपरागत काम खेती-किसानी में जुट जाते हैं। यह उनका रोज का काम है। सभाजीत का कहना है कि उन्हें शासन प्रशासन से किसी भी प्रकार की मदद नहीं मिलती है। हालांकि वह इस बात से काफी खुश हैं कि इस उम्र में पदक जीत रहे हैं।

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बच्चों को बना रहे खिलाड़ी

सभाजीत के तीन पुत्र है रोहन, रोहित और सन्तोष। सभाजीत यादव सिर्फ मैराथन में भाग नहीं लेते हैं, बल्कि अपने तीनों बेटों को भाला फेंकना भी सिखाते हैं | उनका कहना है कि वह देश के लिए पदक नहीं जीत पाए लेकिन वह अपना सपना अपने बच्चों में जीते हैं। उनका बेटा रोहित अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर परचम लहरा रहा है।

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