इत्र के शहर में रोजाना धधक रही हैं 800 से 1000 भट्टियां

इत्र के शहर में रोजाना धधक रही हैं 800 से 1000 भट्टियांकन्नौज में इन भट्ठियों से बढ़ रहा है प्रदूषण।

कम्यूनिटी जर्नलिस्ट: पवन त्रिवेदी (दि अल्ट एंड परफ्यूमर्स एसोसियेशन), उम्र-40 वर्ष

कन्नौज। देश के कई राज्यों में जहां पिछले कई दिनों से धुंध छाई हुई है, वहीं इत्र के शहर के नाम से मशहूर कन्नौज भी इस धुंध से अछूता नहीं है। पिछले दो दिनों से कन्नौज में भी इस धुंध का असर देखा गया। यहां इत्र की 800 से 1000 भट्टियाँ प्रतिदिन धधकती हैं। एक भट्टी में 60-70 किलो लकड़ी प्रतिदिन 3 घंटे में जलायी जाती है।

फीकी पड़ती जा रही है इत्र की खुशबू

कन्नौज उत्तर प्रदेश का एक ऐसा शहर है, जो दुनियाभर में इत्र के शहर के नाम से मशहूर है, मगर यहाँ एलपीजी गैस पाइपलाइन का कनेक्शन न होने की वजह से इत्र की खुशबू फीकी पड़ती जा रही है। आसपास 50-100 किलोमीटर की दूरी पर यहाँ पेड़ दिखाई ही नहीं देते हैं, जिसकी सबसे बड़ी वजह इत्र की भट्टियों का जलना है। बालाजी विश्वनाथ परफ्यूमर्स के विनय त्रिवेदी का कहना है कि हमारे यहां से 25 किलोमीटर की दूरी पर गैस पाइपलाइन निकली है, अगर इसका कनेक्शन हमें मिल जाये तो हमारे यहाँ की इत्र की खुशबू हमेशा बरकरार रहेगी। वो आगे बताते हैं कि कन्नौज में प्रतिदिन हजारों भट्टियाँ जलती हैं, जिससे बहुत ज्यादा प्रदूषण फैलता है। आस-पास पेड़ बहुत कम होने से यहां बारिश भी बहुत कम होती है।

यह परेशानी केवल मेरी नही, बल्कि हजारों मजदूरों की है

इत्र की भट्टी में लकड़ी और कंडे लगाने वाले जगदीश वर्मा (42 वर्ष) का कहना है कि वर्षों से यही काम करता आ रहा हूँ। दिन के 4-5 घंटे रोज भट्टी में लकड़ी और कंडे जलाने पड़ते हैं। वो कहते हैं कि जब लकड़ी गीली होती है, उस समय बहुत मुश्किल होती है। इन भट्टियों से निकलने वाले धुंए से हमारी आँखों में बहुत तकलीफ होती है। जगदीश आगे बताते हैं कि ये परेशानी सिर्फ मेरी ही नहीं, बल्कि यहाँ इत्र की भट्टियों में काम करने वाले हजारों मजदूरों की है, जो सुबह से शाम तक काम करते हैं।

50-60 प्रतिशत कारखाने हैं बंद

कैलाशनाथ अयोध्या प्रसाद परफ्यूमर्स के विवेक पाण्डेय का कहना है कि सरकार अगर चाहती है कि यहाँ के इत्र की खुशबू कभी समाप्त न हो तो यहाँ के लोगों की परेशानियों का समाधान करना पड़ेगा। पर्याप्त संसाधन न होने की वजह से 50 से 60 प्रतिशत तक कारखाने बंद पड़े हैं। वो आगे कहते हैं कि इत्र विशेष जगह का विशेष प्रोडक्ट है। ये विलुप्त न हो, इसके लिए एलपीजी गैस पाइपलाइन कनेक्शन, पैकेजिंग, ट्रांसपोर्टेशन की उचित सुविधा मुहैया कराई जाए।

बीमारियों का शिकार हो रहे हैं लोग

कन्नौज के परफ्यूमर्स का कहना है कि इत्र का कन्नौज में बड़ा इंडस्ट्रीयल स्टेट बनाया जाए। कन्नौज को दुनिया में इत्र के नेचुरल प्रोडक्ट के लिए कैपिटल का दर्जा दिया जाए। ये सब तभी सम्भव हो पायेगा, जब यहाँ के लोगों की परेशानियाँ समाप्त होंगी। इन भट्टियों में बहुत ज्यादा लकड़ी और कंडे जलने से धुंध का असर तो देखा ही जा रहा है, साथ ही लोग अस्थमा जैसी बीमारी के शिकार हो रहे हैं।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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