आखिर कब आएंगे गन्ना किसानों के अच्छे दिन

आखिर कब आएंगे गन्ना किसानों के अच्छे दिनगन्ने की खेती।

कम्यूनिटी जर्नलिस्ट: प्रशांत श्रीवास्तव

बहराइच। विधानसभा चुनाव की दहलीज पर खड़े प्रदेश में गन्ना किसान अपनी मांगों को लेकर मुखर हो सकते हैं। किसान गन्ने का दाम बढ़ने की आस लगाए हैं। दाम बढ़ाने की मांग को लेकर किसान एक बार फिर से अपना मोर्चा खोलने का मूड बना रहे हैं। किसानों ने गन्ने का समर्थन मूल्य कम होने से इस फसल से मुंह मोड़ने का भी फैसला कर लिया है, जिससे इस फसल के उत्पादन पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

कम से कम 400 रुपये प्रति क्विंटल

बलहा ब्लॉक के भवानियापुर गाँव के सुमई गन्ने की खेती करते हैं। उनका कहना है कि अब हमें गन्ने की खेती में कोई मुनाफा नज़र नहीं आता है, बल्कि ये हमारे लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है। सरकार को कम से कम 400 रुपए प्रति क्विंटल गन्ने का दाम घोषित करना होगा। इस दाम पर ही हमको मुनाफा हासिल हो पाएगा।

कई बार हो चुके हैं आंदोलन

गन्ना समर्थन मूल्य को बढ़ाने के लिए जिले में कई बार किसानों ने आंदोलन किए हैं, यहां तक कि जिले के किसान नेता भगतराम मिश्र गन्ने के दाम में वृद्धि व चिलवरिया चीनी मिल द्वारा बकाया मूल्य का भुगतान न करने पर बड़ा आंदोलन भी कर चुके हैं।

जल्द ही हम गन्ना मूल्य वृद्धि को लेकर मुख्यालय पर आंदोलन शुरू करेंगे, जिस तेजी से महंगाई बढ़ी है, उस दर के सापेक्ष गन्ना किसानों को दाम बढ़ाने में सरकार संकोच कर रही है। सरकार किसानों की भावनाओं को समझे और बढ़े गन्ना दामों की घोषणा करे।
भगतराम मिश्र, किसान नेता

बढ़ चुकी है लागत

बीते पेराई सत्र में गन्ने की अगेती फसल का दाम 290 रुपए प्रति क्विंटल था। गन्ना बोआई में लागत बढ़ गई है और खेतों की जोताई, निराई, उर्वरक और गन्ने को कटवाकर मिल तक पहुंचाने में किसानों की लागत पहले से काफी अधिक हो गई है। ऐसे में किसान अब अपनी फसल को 290 रुपए प्रति क्विंटल की दर पर बेचने को तैयार नहीं दिख रहे हैं।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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