बैंगन की खेती से दो महीने में करें हजारों की कमाई

बैंगन की खेती से दो महीने में करें हजारों की कमाईदो माह में किसान बैंगन की फसल लगाकर दो महीनों में ही अच्छी कमाई कर सकते हैं।

दिवेन्द्र सिंह (स्वयं डेस्क)

लखनऊ। अक्टूबर के महीने में किसान गेहूं, सरसों जैसी रबी की फसलें लगाने की तैयारी शुरु कर देते हैं। लेकिन इसी महीने में वे बैंगन की फसल लगाकर दो महीनों में ही अच्छी कमाई कर सकते हैं।

सीतापुर जिले के महोली ब्लॉक के फरका तारा गाँव के किसान मनोज मौर्या पिछले कई वर्षों से बैंगन की खेती करते हैं। मनोज बताते हैं, "बैंगन की खेती में दो-तीन महीने में अच्छी आमदनी हो जाती है, इतनी गेहूं की फसल में नहीं हो पाती है, इस बार भी बैंगन की खेती की तैयारी शुरु कर दी है। एक खेत में लगा दिया है अभी और लगाना है।"

बैंगन की खेती का सही समय

सितम्बर-अक्टूबर के महीने में पौध की रोपाई की जाती है। इसके करीब दो महीने बाद यानी दिसम्बर-जनवरी में बैंगन की फसल तैयार हो जाती है।

बैंगन की उन्नत किस्में

पूसा पर्पल राउंड, पूसा हाईब्रिड-6, पूसा अनमोल और पूसा पर्पल लोंग में से आप किसी भी चुन सकते हैं। एक हेक्टेयर में करीब 450 से 500 ग्राम बीज डालने पर करीब 400 कुंटल प्रति हेक्टेयर तक का उत्पादन मिल जाता है।

ऐसे लगाएं बैंगन

बैंगन का अगर ज्यादा उत्पादन चाहिए, तो दो पौधों के बीच की दूरी का खास ध्यान रखा होता है। दो पौधों और दो कतार के बीच की दूरी 60 सेंटीमीटर होनी ही चाहिए।

खाद और उर्वरक

खाद व उर्वरक की मात्रा मिट्टी की जांच के हिसाब से ही करनी चाहिए। जहां मिट्टी की जांच न की हो खेत तैयार करते समय 25-30 टन गोबर की सड़ी खाद मिट्टी में अच्छी तरह मिला देनी चाहिए। इसके साथ-साथ 200 किलो ग्राम यूरिया, 370 किलो ग्राम सुपर फ़ॉस्फ़ेट और 100 किलो ग्राम पोटेशियम सल्फ़ेट का इस्तेमाल करना चाहिए। यूरिया की एक तिहाई मात्रा और सुपरफ़ॉस्फ़ेट तथा पौटेशियम सल्फ़ेट की पूरी मात्रा खेत में आखिरी बार तैयारी करते समय इस्तेमाल की जानी चाहिए। बची यूरिया की मात्रा को दो बराबर खुराकों में देना चाहिए। पहली खुराक पौधे की रोपाई के तीन सप्ताह बाद दी जाती है जबकि दूसरी मात्रा पहली मात्रा देने के चार सप्ताह बाद दी जानी चाहिए। रोपाई के दो सप्ताह बाद मोनोक्रोटोफास 0.04 प्रतिशत घोल, 15 मि०ली० प्रति लीटर पानी का छिड़काव करें।

पौध संरक्षण

प्ररोह बेधक से प्रभावित फलों और प्ररोहों को जहां से तना मुरझाया हो उसके आधे इंच नीचे से काट दें और उन्हें ज़मीन में गाड़ दें। खेतों को बेधकों से मुक्त रखने के लिए यह काम प्रति दिन करते रहे। मोनोक्रोटोफोस के छिड़काव के 3 सप्ताह बाद डेसिस 0.005 प्रतिशत घोल या 1 मिली प्रति लीटर पानी का छिड़काव करें। डेसिस के छिड़काव के 3 सप्ताह बाद ब्लिटाकस प्रति कैप्टान-2 ग्राम प्रति लीटर पानी और मिथाइल पेराथियोन -2 मिली प्रति लीटर पानी का छिड़काव करे। अगर जैसिड की समस्या हो तो मिथाइल पेराथियोन का छिड़काव फिर से करें लेकिन मिथाइल पेराथियोन छिड़कने से पहले फलों को तोड़ लें। प्ररोह बेधक से प्रभावित फलों और प्ररोहों को जहां से तना मुरझाया हो उसके आधे इंच नीचे से काट दें और उन्हें जमीन में गाड़ दें। खेतों को बेधकों से मुक्त रखने के लिए यह काम प्रतिदिन करते रहें।

मोनोक्रोटोफोस के छिड़काव के तीन सप्ताह बाद डेसिस 0.005 प्रतिशत घोल या 1 मिली प्रति लीटर पानी का छिडकाव करें। डेसिस के छिड़काव के तीन सप्ताह बाद ब्लिटाकस प्रति कैप्टान - 2 ग्राम प्रति लीटर पानी और मिथाइल परथिओन-2 मिली प्रति लीटर पानी का छिड़काव करे। यदि जैसिड की समस्या हो तो मिथाइल पेराथियोन का छिड़काव फिर से करें लेकिन मिथाइल पेराथियोन छिड़कने से पहले फलों को तोड लें।

उत्पादन

बैंगन के फल जब मुलायम हों और उनमें ज्यादा बीज न बनें हों तभी उन्हें तोड़ लेने चाहिए। ज्यादा बड़े होने पर इनमें बीज पड़ जाते हैं और तब ये उतने स्वादिष्ट नहीं रह जाते।

“This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org). “

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