हरे चारे के लिए किसान सर्दियों में करें बरसीम की बुवाई 

हरे चारे के लिए किसान सर्दियों में करें बरसीम की बुवाई बरसीम।

सीतापुर। सर्दियों में पशुओं के हरे चारे की सबसे अधिक दिक्कत होती है। ऐसे में किसान अभी बरसीम की बुवाई कर दिसम्बर से मई तक अपने पशुओं को हरा चारा खिला सकते हैं।

पांच-छह महीने के लिए हो जाती है फुर्सत

सीतापुर जिले के मिश्रिख ब्लॉक के कुंवरापुर गाँव की रहने वाली सुधा पांडेय पशु डेयरी चलाती हैं। सुधा बताती हैं, "अभी तो हरे चारे में हम ज्वार बाजरा दे देते हैं, लेकिन दिसंबर के बाद हरे चारे के लिए बरसीम की बुवाई करा देते हैं। इससे पांच-छह महीने तक आराम से हरा चारा मिल जाता है।"

पशु विशेषज्ञ की सलाह

कृषि विज्ञान केन्द्र, कटिया के पशु विशेषज्ञ डॉ. आनंद सिंह कहते हैं, "बरसीम पशुओं के लिए उत्तम चारा होता है। बरसीम को रबी की फसलों के साथ उगाते हैं। इसके लिए गर्मी की आवश्यकता नहीं होती है इसलिए अक्टूबर-दिसम्बर में ही चारे की बुवाई कर देनी चाहिए।" वो आगे बताते हैं, "चारे की अधिक उपज पाने के लिए साथ ही सरसो का बीज भी एक किलो प्रति हेक्टेयर बो देना चाहिए।"

अगर पहली बार बो रहे हैं तो...

अगर बरसीम खेत में पहली बार बो रहे हैं तो 10 किलो बीज को 200 ग्राम बरसीम कल्चर की दर से उपचारित कर लेना चाहिए। मिट्टी उपचार हेतु ट्राइकोडर्मा पांच किग्रा. प्रति हेक्टेयर के हिसाब से प्रयोग करना चाहिए और चार ग्राम प्रति किग्रा की दर से बीजोपचार भी करना चाहिए।

बुवाई

खेत की चार गुने पांच की तैयार क्यारियों में पांच सेमी. गहरा पानी भरकर उसके ऊपर शोधित बीज छिड़ककर बुवाई करते हैं। बुवाई के 24 घंटे बाद पानी क्यारियों से निकाल देना चाहिए। जहां धान काटने के बाद बरसीम की बुवाई की जाती है, वहां पर यदि धान कटने में देर हो तो धान कटने से पहले 10 से 15 दिन पहले भी बरसीम को धान की खड़ी फसल में छिड़काव विधि से बुवाई करते हैं। बरसीम में नाइट्रोजन की मात्रा की आवश्यकता कम पड़ती है। बरसीम के लिए 20 किग्रा नाइट्रोजन, 80 किलोग्राम फास्फोरस प्रति हेक्टेयर की दर से बोते समय खेत में छिड़ककर मिट्टी में अच्छी तरह मिला देनी चाहिए। इसके बाद क्यारी बनाकर पानी भरना चाहिए तथा बुवाई के बाद करते हैं।

सिंचाई

बरसीम में पहली सिंचाई बीज अंकुरित होने के तुरंत बाद करनी चाहिए। बाद में हर हफ्ते के अंतर पर दो-तीन सिंचाई करनी चाहिए। इसके बाद अंत तक 20 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें तथा मार्च से मई तक 10 दिन के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए।

कटाई

बरसीम में कुल चार-पांच कटाईया करते हैं। बरसीम को छह से आठ सेमी के ऊपर से कटना चाहिए। पहली कटाई बोने के 45 दिन बाद करनी चाहिए। इसके बाद कटाई दिसम्बर एवं जनवरी में 30 से 35 दिन बाद करते हैं और फरवरी में 20 से 25 दिन बाद कटाई करते हैं। इस प्रकार कुल चार से पांच कटाई केवल चारा प्राप्त करने हेतु की जाती हैI

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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