बच्चे बन रहे पत्रकार, सजा रहे खबरों का संसार

बच्चे बन रहे पत्रकार, सजा रहे खबरों का संसारफोटो साभार: गूगल।

स्वयं प्रोजेक्ट

लखनऊ। निजी स्कूल के बच्चे हों या सरकारी स्कूल के, या फिर कॉलेज जाने वाले या पासआउट हो चुके युवा, किसी से भी अगर करियर के बारे में पूछो तो ज्यादातर युवा डॉक्टर, इंजीनियर, पायलेट और आईएएस बनने की तमन्ना रखते हैं। आम युवाओं की अपेक्षा उनकी संख्या कम ही देखी जाती है जो पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं। लेकिन सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले नन्हे बच्चों का रुझान पत्रकारिता की ओर बढ़ रहा है।

आस-पास की घटनाओं को उतारेंगे अपनी भाषा शैली में

कुछ सरकारी स्कूलों में बच्चों में बचपन से ही पत्रकार बनने की रुचि जाग रही है। बच्चों की रुचि को देखकर शिक्षक उनको बाल पत्रकार के तौर पर देख रहे हैं और उनसे स्कूल व छात्रों से जुड़ी दिन भर की खबरों को बाल अखबार के जरिये लिखवा रहे हैं। इससे जहां बच्चों में खबरों को जमा करने और इनके महत्व को जानने का अवसर मिल रहा है तो वहीं शिक्षक भी स्कूल व छात्रों से जुड़ी समस्याओं से रूबरू हो रहे हैं। स्कूलों में पढ़ने वाले वह बच्चे जो पत्रकार बनने की तमन्ना रखते हैं] वह बाल पत्रकार की भूमिका निभायेंगे और अपने स्कूल व आस-पास के क्षेत्र की घटनाओं व छात्रों और ग्रामीण लोगों की समस्याओं को अपनी भाषा-शैली में पेज पर उतारेंगे।

बच्चों में पैदा होता है आत्मविश्वास

उच्च प्राथमिक विद्यालय बेथर, सिकन्दरपुर कर्ण, उन्नाव की शिक्षिका मीतू सिंह कहती हैं कि छात्रों में सृजनात्मक क्षमता को विकसित करने, उनमें अभिव्यक्ति की क्षमता का विस्तार करने, कला, संस्कृति व साहित्य के प्रति अभिरुचि पैदा करने, देश-दुनिया व राज्य-समाज की स्थितियों से साक्षात्कार कराने के लिए बाल अखबार को बच्चों से तैयार करवाया जाता है। उन्होंने कहा कि इससे छात्रों में लिखने व पढ़ने की रुचि पैदा होती है। साथ ही उनमें नेतृत्व की क्षमता बढ़ती है और जो छात्र पढ़ने-लिखने में कमजोर हैं उनमें आत्मविश्वास भी उत्पन्न होता है।

क्या कहते हैं छात्र

कक्षा 8 में पढ़ने वाले आशीष के अनुसार, वह अखबार में प्रतिदिन की जानकारी देते हैं। जैसे कि आज कक्षा में 35 में से 25 छात्र उपस्थित रहे, बुधवार को एमडीएम में खीर मिली, विद्यालय में लगाये दो पौधों को बन्दरों ने उखाड़ दिया। सभी अध्यापक प्रार्थना के समय एकत्र थे, आज कक्षा में राजेश और अतुल के बीच कहासुनी हुई, नयी ड्रेस के लिए बच्चों का नाप लिया गया। आशीष के अनुसार, इससे हर चीज और विषय के बारे में जानकारी होने के कारण घरवाले, ग्रामीण और शिक्षक मुझे पसंद करते हैं।

हर स्कूल में शुरू हो तो और अच्छा

इस बारे में एडी बेसिक महेन्द्र सिंह राणा ने कहा कि हर स्कूल में दैनिक बाल अखबार बनवाये जाने की शुरुआत हो, तो और अच्छा है। इससे बच्चों के आत्मविश्वास और सामान्य ज्ञान दोनों में बढ़ोत्तरी होगी। उन्होंने कहा कि इससे छात्रों की उपस्थिति में सुधार होगा, साथ ही नेतृत्व क्षमता का भी विकास होगा। इससे विद्यालय का रिपोर्टिंग स्वरूप में भी सुधार होगा।

बच्चे रोज पढ़कर आते हैं अखबार, रहती है सामान्य ज्ञान की जानकारी

वहीं आदर्श जूनियर हाईस्कूल के प्रधानाध्यापक संदीप सिंह कहते हैं कि दैनिक बाल अखबार जहां विद्यालय की हर एक गतिविधि को दर्ज कर सकता है तो वहीं इसका साप्ताहिक, मासिक या वार्षिक संस्करण छात्रों की क्रियाशीलता को भी दर्शाता है। बच्चों में आत्मविश्वास आ रहा है और बच्चों की रुचि पत्रकारिता में बढ़ रही है। बच्चे हर रोज अखबार पढ़कर आते हैं और देश व शहर में हुई घटनाओं व कार्यक्रमों के बारे में प्रतिक्रिया देते हैं। इससे उनका सामान्य ज्ञान तो बढ़ता ही है साथ ही आत्मविश्वास भी बढ़ता है।

मैं टीवी में पत्रकार बनना चाहती हूं

प्राथमिक विद्यालय गोहरामऊ में कक्षा 5 में पढ़ने वाली मनीषा ने बताया कि हम लोगों को मैम हर दिन अखबार में छपी खबरों के बारे में बताती हैं। इसके बाद हम लोग इसी आधार पर अपने स्कूल और गांव से जुड़ी खबरों को एकत्र कर के मैम को बताते हैं, जहां हम लोगों से साप्ताहिक तौर पर अखबार बनवाया जाता है। इसके जरिये हम लोग जागरुक रहते हैं और हम लोगों का सामान्य ज्ञान भी बढ़ रहा है। मनीषा कहती हैं कि मैं टीवी में पत्रकार बनना चाहती हूं इसलिए मुझे अभी से खबरें एकत्र करना अच्छा लगता है।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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