पीएम का संसदीय क्षेत्र : यहां सोच है, शौचालय है, लेकिन जिम्मेदार बेपरवाह

पीएम का संसदीय क्षेत्र  : यहां सोच है, शौचालय  है, लेकिन  जिम्मेदार बेपरवाहपीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में स्वच्छता अभियान का हाल दर्शाता टॉयलेट।

वाराणसी। एक तरफ पूरे देश को खुले में शौच से मुक्त करने के लिए तमाम सरकारी अभियान चलाए जा रहे हैं, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में इस अभियान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। वह भी खुद सरकारी महकमे द्वारा। इससे बड़ी विडंबना क्या होगी कि जो गाँव ओडीएफ (खुले में शौचमुक्त) घोषित हो चुके हैं, वहां अब भी कई घरों में शौचालय नहीं बन पाए हैं। अगर कहीं हैं भी तो किसी में दरवाजा नहीं है तो किसी की छत गायब है। पीएम मोदी के गोद लिए गाँव जयापुर का भी यही सूरते-हाल है।

पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के एक शौचालय में कूड़ा करकट दिखाता एक ग्रामीण।

जिले के आराजी लाइन विकास खंड में 30 गाँवों को ओडीएफ घोषित किया जा चुका है। इन गाँवों में अधिकारियों ने कैंप लगाकर लोगों को शौचालय इस्तेमाल के लिए जागरूक किया, लेकिन आज यहां कुछ शौचालय ही इस्तेमाल की स्थिति में हैं। पीएम के गोद लिए गाँव जयापुर में भी यही हाल है। जयापुर गाँव के रहने वाले भुवन (45 वर्ष) कहते हैं, “मोदी जी ने जब गाँव गोद लिया था, तब यहां के लोगों में उत्साह था। उनके मुंह से निकले शब्दों और विचारों को सुनने के बाद लोग उसे अमल में लाते थे, लेकिन अब वैसी स्थिति नहीं है।”

पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में बने शौचालयों पर ताला जड़ा हुआ।

55 वर्षीय राम सिंह कहते हैं, “गाँव के शौचालय बदहाल हैं, लेकिन अब यहां कोई अधिकारी झांकने तक नहीं आता है। इसलिए लोग भी अपनी पुरानी आदतों को फिर से अमल में लाने लगे हैं।” वहीं अफसर इसके लिए कहीं न कहीं ग्रामीणों को भी जिम्मेदार मानते हैं। उनके मुताबिक कुछ असामाजिक तत्व शौचालयों को क्षतिग्रस्त कर देते हैं।

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ब्लाक विकास अधिकारी हेमंत सिंह कहते हैं, “जयापुर और नागेपुर गाँव में हर दूसरे शनिवार को हमारी टीम जाती है। फिलहाल जयापुर में 635 शौचालय बनाए गए हैं, जिसमें से सिर्फ 20-25 ही प्रयोग में नहीं हैं। एक हफ्ते के अंदर उसे तैयार कर गाँव वालों को सुपुर्द कर दिया जाएगा।” हेमंत सिंह ने बताया, “45 गाँवों को तीन चरणों में ओडीएफ बनाने की योजना पर युद्ध स्तर से काम चल है। हम लोगों के काफी समझाने के बावजूद कुछ लोग अब भी खुले में शौच के लिए जाते हैं।”

ओडीएफ गाँवों में शौचालय बदहाल

काशी विद्यापीठ ब्लॉक के अधीन आने वाले 93 गांवों को ओडीएफ बनाने का लक्ष्य है, लेकिन घोषित 39 गाँवों में कहीं शौचालय अधूरे पड़े हैं, तो कहीं निर्माण कार्य चल रहा है। शहर से सटे होने के बावजूद अधिकतर गाँवों में लोग खुले में शौच के लिए जा रहे हैं। मसलन, लखनपुर गाँव में स्वीकृत 76 शौचालयों में सभी का निर्माण हो चुका है, लेकिन महज कागजों में। ज्यादातर शौचालयों पर ताले लगे हैं या उनमें लकड़ी-कंडे भरे हुए हैं। ब्लाक कार्यालय स्थित मूत्रालय और शौचालयों की स्थिति और भी बदतर है। यह हाल तब है, जब ब्लाक से जुड़े अधिकारियों-कर्मचारियों की उपस्थिति हमेशा रहती है।

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एडीओ पंचायत रविंद्र कुमार सिंह कहते हैं, “ब्लाक परिसर में बने शौचालय का यह हाल गाँव के लोगों नेकिया है। कुछ आसामाजिक तत्व हैं, जो खुराफात से बाज नहीं आते। वहीं कुछ लोग ऐसे हैं जो यह दलील देते हैं कि शौचालय में गर्मी लगती हैं। बरसात में हम उसका इस्तेमाल करेंगे।” ओडीएफ के बारे में पूछे जाने पर एडीओ ने बताया, “इस ब्लाक को ओडीएफ बनाने की योजना है।”

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रामेश्वर ब्लॉक के क्षेत्र पंचायत सेवापुरी में 60 गाँव ओडीएफ के लिए चयनित किए गए हैं। इनमें से 30 गाँवों में कागजी काम पूरा हो चुका है। शेष में कार्य चल रहा है। निर्माण में घटिया मानक व सही मटेरियल का उपयोग न करने से अधिकतर जर्जर स्थिति में पहुंच चुके हैं। 45 वर्षीय रामजियावन कहते हैं, “जो टीम लोगों को खुले में शौच करने से मना करती थी, वह अब यहां दिखती नहीं है।” 80 वर्षीय लीला देवी बताती हैं, “सुबह शाम बजने वाली सीटी भी अब सुनाई नहीं देती है।”

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First Published: 2017-06-02 14:41:18.0

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