प्रतापगढ़ का धीरगंज रेलवे स्टेशन हो रहा बदहाली का शिकार

प्रतापगढ़ का धीरगंज रेलवे स्टेशन हो रहा बदहाली का शिकारधीरगंज रेलवे स्टेशन में नहीं है प्लेटफार्म

स्मृति सिंह- कम्यूनिटी जर्नलिस्ट

कक्षा- 12 उम्र-16 वर्ष

स्कूल- राजकीय कन्या इंटर कालेज, खरवई, प्रतापगढ़

प्रतापगढ़। यहां ट्रेन तो रूकती है, लेकिन सुबह नौ बजे के बाद टिकट नहीं मिलता। प्लेटफॉर्म तो कब का बहकर नहर में मिल गया है। कई ग्रामीणों ने अधिकारियों से शिकायत भी की लेकिन अभी तक कुछ नहीं हो पाया।

धीरगंज रेलवे स्टेशन (उत्तर रेलवे) इलाहाबाद-फैज़ाबाद रेल खंड का प्रतापगढ़ का आखिरी और इलाहाबाद का पहला स्टेशन है। प्रतापगढ़ और इलाहाबाद की सीमा पर होने के कारण दोनों जिलों के लगभग पचासों गाँव के हजारों लोग इसी स्टेशन से ट्रेन पकड़ते हैं।

हर रोज़ हजारों यात्री पकड़ते हैं यहां से ट्रेन

शिवगढ़ ब्लॉक के देल्हुपुर गाँव के आकाश सिंह (18 वर्ष) इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढ़ते हैं। आकाश बताते हैं, "सुबह नौ बजे तक ही टिकट मिलता है, वो भी जब ट्रेन आने वाली होती है तब या तो ट्रेन छोड़े या फिर बिना टिकट यात्रा करें।"

मानधाता ब्लॉक के खरवई गाँव के प्रदीप मिश्रा कहते हैं, "प्लेटफॉर्म तो अब बस नाम मात्र का रह गया है, इसकी वजह से कई बार लोग घायल हो चुके हैं। टिकट घर तो पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो चूका है।" वो आगे बताते हैं, "मैंने आस पास के गाँव के हजारों लोगों का हस्ताक्षर कराया था, जिसे हम रेल मंत्री को भेजने वाले थे, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हो पाया।"

धंस चुका है रेलवे लाइन के पास सीमेंटेड प्लास्टर

प्रतापगढ़ जिले के लोगों को स्टेशन तक पहुंचने के लिए नहर पार करना पड़ती है, नहर का पुल भी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है। कई बार दुर्घटना भी हो गयी है। यहां से सैकड़ों छात्र और नौकरी पेशा लोग ट्रेन पकड़ते हैं।

यहां पर टिकट ठेका पर दिया जाता है। स्टेशन के बगल के गाँव नेवादा के पवन मिश्रा ने ठेका लिया है। अब उनके दादा विश्वनाथ मिश्रा (75 वर्ष) ही टिकट देते हैं। विश्वनाथ मिश्रा कहते हैं, सुबह ही टिकट दे पाता हूं, नहर पार करके जाना पड़ता है, रात में जाना मुश्किल हो जाता है, स्टेशन के बगल के लड़के बहुत परेशान करते हैं। सब कुछ उखाड़ ले गए हैं न ही नल बचा है और न और कुछ।"

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