डिजिटल ग्राम में बिजली तो अभी तक नहीं आई, लेकिन बिल जरूर आता है 

डिजिटल ग्राम में बिजली तो अभी तक नहीं आई, लेकिन बिल जरूर आता है बिजली के खम्बे 

नवनीत अवस्थी/स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

परियर (उन्नाव)। सदर तहसील के अंतर्गत डिजिटल ग्राम में चयनित ग्राम मरौंदा मझवारा को डिजिटल गाँव बनाए जाने की कवायद तो लगभग पूरी हो गई है। लेकिन यहां के ग्रामीण आज भी बिजली को तरस रहे हैं। यह भी तब है, जब तीन साल पहले ही इस गाँव में बिजली कनेक्शन दिया जा चुका है। यह भी विडंबना है कि ग्रामीणों की शिकायत के बावजूद अधिकारियों-जिम्मेदारों का ध्यान इस ओर नहीं गया।

डिजिटल ग्राम मरौंदा सूचित के उद्घाटन के बाद अब इसी सप्ताह डिजिटल ग्राम मरौंदा मझवारा का भी उद्घाटन होना है। अधिकारी बड़े जोर शोर से गाँव की साफ़-सफाई के साथ गांव को डिजिटल बनाने में लगे हुए हैं। जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे भी लग चुके हैं, लेकिन बिजली के जिन खम्भों में कैमरे बांधे गए हैं, उन खम्भों में न तो बिजली का तार है और न ही कोई ट्रान्सफार्मर। इस ओर किसी का ध्यान नहीं गया।

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बता दें कि आज से लगभग तीन वर्ष पूर्व बीपीएल धारकों की मुफ्त बिजली कनेक्शन के तहत मरौंदा मझवारा के लोगों ने भी सफीपुर विद्युत उपकेंद्र से बिजली कनेक्शन करवाए थे, जिस पर उनके नाम से कनेक्शन जारी होने की रसीद तो कट गई, लेकिन बिजली की लाइन तीन वर्ष बाद भी उनके घर तक नहीं पहुंची। बाकायदा कनेक्शन धारकों के नाम से हर माह बिल भी आता है, लेकिन बिजली की लाइन घर तक पहुंचनी तो दूर, उनके मोहल्ले तक भी नहीं पहुंच सकी है। ग्रामीणों का कहना है कि इसकी शिकायत कई बार जेई से की गई, लेकिन वह लाइन जोड़ने के लिए सुविधा शुल्क की मांग करता है।

गाँव के ही जसवंत पुत्र रमेश ने बताया, “लगभग तीन साल से सिर्फ बिजली का बिल आता है। जब हम जेई से पूछते है कि खाली पड़े खम्भों में तार कब लगेंगे तो वह बोलते हैं कि पहले पैसे का इंतजाम करो।”

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राजू पुत्र मेवालाल, अरुण कुमार पुत्र चन्द्र शेखर, लवकुश मिश्रा आदि ने बताया कि हम लोगों की लाख कोशिशों के बावजूद मोहल्ले तक सिर्फ बिजली के खम्भे ही गाड़े गए हैं, इनमें तार बांध कर हमारे घर तक बिजली पहुंचना तो जैसे सिर्फ सपना ही है। बिजली वाले हर माह सिर्फ बिजली का बिल भेज देते है। जेई रामशंकर ने बताया कि ग्रामीणों की समस्या का हल निकाला जा रहा है।

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