किसानों को नहीं पता फसल अवशेष जलाने का नुकसान

किसानों को नहीं पता फसल अवशेष जलाने का नुकसानअगली फसल की तैयारी के लिए खेतों में फसल अवशेष जला देते हैं किसान।

कम्यूनिटी जर्नलिस्ट: रोहित वर्मा (23)

सहार (औरैया)। किसान अपने खेत में फसल अवशेष जला तो देते हैं, लेकिन उन्हें जानकारी नहीं है कि फसल के अवशेषों को जलाने से न केवल पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है, बल्कि खेत का उपजाऊपन भी कम हो रहा है।

क्योंकि समय नहीं होता

औरैया जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर सहार ब्लॉक में धान कटते ही किसान खेत की बोआई के लिये खेत को साफ करने के लिये खेत में ही पुआल जला देते हैं। पुरवा मदारी गाँव में रहने वाले सोनेलाल बाथम (55 वर्ष) का कहना है कि धान की कटाई होते ही जल्दी रहती है गेहूं बोआई की। अगर मजदूर लगाकर खेत साफ कराएंगे तो समय भी ज्यादा लगेगा और पैसा भी। वो आगे बताते हैं कि इन दोनों चीजों की बचत के लिये हम खेत में ही जला देते हैं और जली हुई राख हमारे खेत के लिए खाद का काम करती है। मगर वास्तव में इससे खेत का उपजाऊपन कम होता है।

ऐसे आता था काम

खेत में पुआल जला रहे कई किसानों से बात की। किसानों का कहना हैं कि उन्हें पुआल जलाने के नुकसान की जानकारी नहीं है। कुछ वर्षों पहले खेत में पुआल इस वजह से नहीँ जलाते थे क्योंकि पहले इस पुआल का छप्पर बनाने और जानवरों को चारा खिलाने के काम आते थे। किशन गुप्ता (40 वर्ष) का कहना है कि अगर कृषि वैज्ञानिक हम किसानों को समय-समय पर प्रशिक्षण दे और इसके फायदे-नुकसान बतायें। जिससे किसान अपने खेतों में ये खरपतवार न जलायें और इससे होने वाले नुकसान से बच सकें।

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