Gaon Connection Logo

कटहल की खेती से लाखों रुपए कमा रहे किसान  

agriculture

सुंदर चंदेल, स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

मेरठ। अच्छे पैकेज की प्राइवेट जॉब छोड़ किसान ने पुस्तैनी जमीन पर कटहल की खेती शुरू की, जिससे 20 लाख रुपए प्रति साल की आमदनी कर उसने अन्य लोगों को भी खेती करने पर मजबूर कर दिया। उसकी सफलता के बाद गाँव के अन्य लोगों ने भी कटहल की खेती शुरू की है।

हस्तिनापुर ब्लॉक के गाँव रानीनंगला निवासी मनोज पोसवाल बताते हैं, “मैंने 2010 में प्राइवेट कंपनी में जॉब शुरू की थी, लेकिन बॉस की रोजाना की चिकचिक के चलते जॉब को महज एक साल में ही अलविदा कह दिया। रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया।

इसके बाद मन में तकनीकी रूप से खेती करने की आई, लेकिन घरवालों व गाँव वालों के भय से हिम्मत नहीं जुटा पाया। पिता जी से जिक्र किया तो उन्होने कहा, जब खेती ही करनी थी तो एमएससी करने की क्या जरूरत थी। सबकी परवाह किए बगैर दस बीघा जमीन पर कटहल का बाग लगा दिया।

ये भी पढ़ें- भारत-चीन के बीच बढ़ा तनाव, दोनों देशों ने तैनात किए तीन हज़ार सैनिक

मनोज बताते हैं, “पिता जी के साथ गाँववालों ने भी उसे पागल बताया, लेकिन वह एक-एक कर कटहल के पेड़ों को बड़ा होने का इंतजार करने लगा। मैंने स्टडी के दौरान पढ़ा था कि चार साल बाद पेड़ फल देने लगता है। 2014 में पहली बार पेड़ों ने फल देना शुरू किया। पहले ही वर्ष करीब नौ लाख का कटहल मैंने बेचा। अगली बार आमदनी बढ़कर 15 लाख और इस बार करीब 22 लाख रुपए का कटहल बेचा।”

मनोज ने बताया कि बागवानी के बाद चार साल का सयंम रखना पड़ता है। इस दौरान आप नीचे खाली पड़ी जमीन और खेती कर सकते हैं। इसके बाद 45 साल तक पेड़ फल देते हैं, हां समय-समय पर जरूरी दवाइयों का छिड़काव करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि कटहल को वैजेटेरियन मीट के नाम से भी जाना जाता है। जिस वक्त योगी सरकार ने मीट की दुकानों पर पाबंदी लगा दी थी, उस वक्त कटहल की बहुत डिमांड बढ़ गई थी।

ताजा अपडेट के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें।

More Posts

मोटे अनाज की MSP पर खरीद के लिए यूपी में रजिस्ट्रेशन शुरू हो गया है, जानिए क्या है इसका तरीका?  

उत्तर प्रदेश सरकार ने मोटे अनाजों की खरीद के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया है। जो किसान भाई बहन मिलेट्स(श्री...

यूपी में दस कीटनाशकों के इस्तेमाल पर लगाई रोक; कहीं आप भी तो नहीं करते हैं इनका इस्तेमाल

बासमती चावल के निर्यात को बढ़ावा देने और इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने...

मलेशिया में प्रवासी भारतीय सम्मेलन में किसानों की भागीदारी का क्या मायने हैं?  

प्रवासी भारतीयों के संगठन ‘गोपियो’ (ग्लोबल आर्गेनाइजेशन ऑफ़ पीपल ऑफ़ इंडियन ओरिजिन) के मंच पर जहाँ देश के आर्थिक विकास...