किचन से चौपाल तक महिला प्रधान का जलवा , देखिए माहेजबी की कहानी

किचन से चौपाल तक महिला प्रधान का जलवा , देखिए माहेजबी की कहानीमाहेजबी - ग्राम प्रधान , बाराबंकी

बाराबंकी। ज्यादातर बार जिन गांवों में महिला प्रधान होती हैं, वहां प्रधानी पति और उनके बेटे करते हैं। लेकिन कुछ महिला प्रधान ऐसी हैं जिन्होंने अपने काम और फैसलों ने न सिर्फ खुद को साबित किया है बल्कि गांव के विकास की बयार भी बहाई है।

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले की महिला प्रधान माहेजबी ऐसी ही एक प्रधान हैं, जो घर की रसोई से लेकर गांव की चौपाल और अधिकारियों के दफ्तरों तक अपने काम और फैसलों से सबका दिल जीत लेती हैं। वो दबंगों से लड़कर पहले तो अपने गांव के तालाब को अवैध कब्जे से मुक्त कराती हैं फिर शरीर झुलसाने वाली धूप में खड़ी होकर उसका कायाकल्प करवाती हैं।

ये माहेजबी की मेहनत का ही नतीजा है कि गाँव की ज्यादातर शिकायतें अधिकारियों तक पहुंचने से पहले ही गाँव में सुलझा दी जाती हैं । इस बात को बड़े फ्रक के साथ बताते हुए वो कहती हैं, “ मेरे गांव में मेरी जहां भी जरूरत होती है मैं वहां खुद जाती हूं, ज्यादा से ज्यादा ये प्रयास करती हूं कि मैं जनता को टाइम दूं, जिसको भी मदद चाहिए मैं देने के लिए तैयार रहती हूं।”

मजदूरों के बीच काम देखती माहेजबी

अपने क्षेेत्र में हो रहे काम को लेकर माहेजबी काफी जुझारु हैं, कभी भू-माफियाओं के कब्जे में रही सरकारी जमीन पर अब वो तालाब खुदवा रहीं हैं, इस खुदाई का स्वंय नीरीक्षण करते हुए माहेजबी बताती हैं, “ मेरे क्षेत्र में कोई भी अवैध कब्जे की शिकायत नहीं है मैं खुद मौके पर जाकर सबका काम देखती हूं।”

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हालांकि माहेजबी सकार से कुछ ख़फा जरूर दिखी क्योंकि सपा सरकार के दौरान उन्हें जन सहयोग और सामाजिक सौहार्द को प्रोत्साहन देने के चलते जिला प्रशासन द्वारा महारानी लक्ष्मी बाई वीरता पुरूस्कार के लिए चुना गया, मगर दुर्भाग्य वश वो राजनीति का शिकार हो गयी और पुरुस्कार किसी दूसरे को दे गिया गया, थोड़ा मायूस होकर माहेजबी बताती हैं, “रानी लक्ष्मी बाई पुरुस्कार के लिए मुझे बीडीओ और जिले के डीएम ने रीकमेन्ड करके भेजा, और मुझे उस कार्यक्रम में भी बुलाया गया, मगर एन्ड वक्त पर मेरा नाम लिस्ट से काट दिया गया। ”

काम का मुआयना करतीं माजेजबी।

हालांकि पुरुस्कार ना मिलने से माहेबजबी के हौसले कम नहीं हुए हैं वो अब भी अपने प्रधान होने के दायित्व को पूरी क्षमता से निभा रही हैं।

गांव कनेक्शन के लिए सतीश कश्यप की रिपोर्ट

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